Friday, November 04, 2016

आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे हैं केजरीवाल

आत्महत्या कानूनन अपराध है और उसे शहीद कहकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा एक करोड़ रूपये का सम्मान देकर समाज को प्रेरित करना क्या उससे बड़ा अपराध नहीं है ?

पत्रकारिता का गिरता स्तर

पत्रकारिता का अर्थ खबर प्रकाशित करना है उसे अच्छा या बुरा समझना पाठक का काम है, अपुष्ट विचार पाठक के दिमाग में भरना पत्रकारिता नहीं है।

Saturday, October 22, 2016

सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था


सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था

विवाद क्यों पैदा हुआ था:-

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था, यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। "बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है अधर्म है
"(भवान् निवेशय प्रथमं) मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है,अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नि कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नि बताया हो?
उत्तर:-(1) द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?
आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।- (विराट १८/१)
द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।

(2) वह भीम से कहती है - जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों, जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-
भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)
द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं, फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं वह मैं दुःखी हूँ पर होते तब ना।

(3) जब भीम ने द्रौपदी को, कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था,"जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था, जिसने मेरे भाई की पत्नि का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

(4) द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया।उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था। क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था,"जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)
ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नि का स्वामी रहता है।
यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं।यदि द्रौपदी पाँच की पत्नि होती तो वह, बजाय चुप हो जाने के पूछती, जब मैं पाँच की पत्नि थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि"पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है?यह न्यायविरुद्ध है।"

स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नि होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो पर है तो इसका स्वामी ही और नियम बता दिया "जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।"

(5) द्रौपदी कहती है- कौरवो, मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूँ तथा उनके ही समान वर्ण वाली हूँ।

सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था


सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था

विवाद क्यों पैदा हुआ था:-

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था, यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। "बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है अधर्म है
"(भवान् निवेशय प्रथमं) मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है,अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नि कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नि बताया हो?
उत्तर:-(1) द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?
आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।- (विराट १८/१)
द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।

(2) वह भीम से कहती है - जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों, जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-
भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)
द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं, फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं वह मैं दुःखी हूँ पर होते तब ना।

(3) जब भीम ने द्रौपदी को, कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था,"जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था, जिसने मेरे भाई की पत्नि का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

(4) द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया।उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था। क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था,"जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)
ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नि का स्वामी रहता है।
यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं।यदि द्रौपदी पाँच की पत्नि होती तो वह, बजाय चुप हो जाने के पूछती, जब मैं पाँच की पत्नि थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि"पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है?यह न्यायविरुद्ध है।"

स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नि होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो पर है तो इसका स्वामी ही और नियम बता दिया "जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।"

(5) द्रौपदी कहती है- कौरवो, मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूँ तथा उनके ही समान वर्ण वाली हूँ।

Tuesday, September 27, 2016

गुजरात के सफाई कर्मचारी भाई अधीर न हों गलत लोगों के बहकावे में न आएं

गुजरात के सफाई कर्मचारी भाई अधीर न हों गलत लोगों के बहकावे में न आएं सरकार आपके मान सम्मान और स्वाभिमान की चिंता करेगी आपकी मांगों पर विचार करेगी।

Thursday, September 22, 2016

मायावती नें तथाकथित दलितों को सिर्फ ठगा और बेचा, भाजपा नें दिया सम्मान

क्रम रुकने न दें समस्त जानकारी हर मोबाइल में पहुँच जाये तब तक फॉरवर्ड करते रहें
शान्त प्रकाश जाटव
भाजपा सरकार की घोषित योजनाएँ जिसका सीधा लाभ गरीब वर्ग को मिलता है जिनमें अधिकांश अनुसूचित जातियां हैं

प्रधानमन्त्री जनधन योजना – देश के सभी लोगों का खाता खोला गया

बीमा योजना - मात्र 330 रूपये वार्षिक पर 2 लाख का जीवन बीमा और मात्र 12 रूपये वार्षिक पर 2 लाख रूपये का दुर्घटना बीमा

अटल पेंशन योजना – 60 वर्ष के उपरांत 1000 रुपए से 5000 रुपए तक पेंशन योजना

मुद्रा बैंक योजना – छोटे उधमियों को 15 लाख तक कम ब्याज पर बिना गारंटी के ऋण देने की योजना

मेक इन इंडिया – देश के 125000 राष्ट्रीयकृत बेंकों की शाखाओं के माध्यम से प्रत्येक बैंक द्वारा कम से कम 1 या उससे अधिक अनुसूचित जाति वर्ग के व्यवसाई को उधमी बनाना

शिक्षित बनो – अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभावान छात्रों 10 लाख देश में अध्यन व् 20 लाख विदेश में अध्यन हेतु बिना गारंटर ऋण देना

चिकित्सा सम्बन्धी आर्थिक सहायता – 1 लाख वार्षिक आय तक के अनुसूचित जाति समाज के लोगों के लिए ह्रदय रोग, किडनी सम्बन्धी जैसे गंभीर रोग के इलाज के लिए 3 लाख रूपये तक की सहायता का केंद्र सरकार द्वारा प्रावधान
शान्त प्रकाश जाटव

सिर्फ भाजपा नें डॉ अम्बेडकर का किया सम्मान

1. भाजपा सरकार द्वारा डा.अम्बेडकर की जन्मभूमि (महू, मध्य प्रदेश) पर भव्य स्मारक बनाया।

2.  डा.अम्बेडकर परिनिर्वाण स्थल दिल्ली स्थित आवास 26 अलीपुर रोड भाजपा सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक एवं संग्रहालय घोषित किया.

3.  बाबा साहब  डा.अम्बेडकर की दीक्षा भूमि (नागपुर) तथा चैत्य भूमि (दादर, मुंबई) पर भव्य स्मारक का निर्माण भाजपा सरकार नें किया।

4.  वर्ष 1989 में भाजपा नें विशेष प्रयास कर संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में डा.अम्बेडकर का चित्र लगवाया और डा.अम्बेडकर को भारत रत्न  की उपाधि से सम्मानित करवाया।

5. प्रधानमंत्री मोदी जी ने महाराष्ट्र सरकार को 12 एकड़ इंदु मिल की जमीन पर अम्बेडकर मेमोरियल निर्माण करने का आदेश दिया है। जिसमें एक तालाब, एक 25,000 वर्ग फुट का स्तूप, एक 39,622 वर्ग फुट इंटरैक्टिव संग्रहालय, एक भूमिगत पुस्तकालय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक सभागार ब्लॉक होगा।

6. इंग्लैंड स्थित डॉ अम्बेडकर के निवास को भाजपा सरकार ने वर्ष 2014 में खरीदकर स्मारक बनाया।

7. नई दिल्ली में डॉ अम्बेडकर पुस्तकालय का मोदी जी नें शिलान्यास किया 2015

8. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अलग अलग गठन किया एवं अलग-अलग मंत्रालय बनवाए।

9. अनुसूचित जाति एवं जनजाति के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के रोकथाम और उनके मुकदमों के ट्रायल के लिए विभिन्न राज्यों में 137 विशेष अदालतों एवं विशेष प्रकोष्ठों का गठन किया।

10.  आरक्षित रिक्तियों को 50 प्रतिशत सीलिंग की मर्यादा से मुक्त करवाया।

11.  अनुसूचित जाति के अभ्यार्थियों को क्वालीफाईंग अंकों में छूट देने और पदोन्नति के समय पर छूट प्रदत स्तर पर  नियुक्ति करने का कानून बनाया।

12.  2001 की जनगणना के आधार पर राज्य विधानसभाओं व् लोकसभा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की पुनर्स्थापना का क़ानून बनाया।

13.  अनुसूचित जाति एवं जनजाति अभ्यार्थियों को पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान किया।

14.  1991-92 में श्री राजनाथ सिंह जी  के शिक्षामंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति के शिक्षकों का बैकलॉग जो पूर्ववर्ती गैर भाजपा सरकारों द्वारा वर्षों से लंबित पड़ा था को शत-प्रतिशत पूर्ण किया गया।

15.  उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन भाजपा शासन के दौरान किया गया।
शान्त प्रकाश जाटव

कांग्रेस द्वारा अनुसूचित जाति समाज एवं डा. अम्बेडकर के विरोध में किये गए कार्य :

1. वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव  में कांग्रेस द्वारा श्री नारायण काजोलकर को काग्रेस प्रत्याशी के रूप में डा.अम्बेडकर के मुकाबले खड़ा कर दिया और डा.अम्बेडकर चुनाव हार गए।

2.  वर्ष 1953 में भंडारा (महाराष्ट्र) में लोकसभा उपचुनाव में भी डा.अम्बेडकर के सामने श्री वानखेड़े को कांग्रेस प्रत्याशी बना कर खड़ा कर दिया परिणाम स्वरुप डा.अम्बेडकर पुनः चुनाव हार गए।

3. कांग्रेस नें धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शैक्षिक एवं व्यवसायिक संस्थाओं (देश में लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा) में प्रवेश हेतु अनुसूचित जाति वर्ग को आरक्षण न देने कि अनुमति दी।

4.  आज़ादी के बाद देश का कोई भी प्रधानमंत्री रहा हो सब की एक ही नीति रही कि देश के आर्थिक विकास के संसाधनों पर पहला अधिकार केवल अनुसूचित वर्ग का है लेकिन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह नें उपरोक्त सर्वमान्य नीति को बदल कर घोषणा कर दी कि देश के आर्थिक संसाधनों पर अनुसूचित वर्ग का नहीं बल्कि मुसलमानों का हक़ है।

5.  अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण को धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमानों को भी देने का कुषड्यंत्र कांग्रेस द्वारा किया गया।

6.  कांग्रेस के शासन में 45% लोग गरीबी की रेखा से नीचे थे जिसमें 51% लोगों को बीपीएल कार्ड नहीं मिले।

7.    सरकारी गोदामों में हजारो टन गेहूं सड़ता रहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गरीबों में वह अनाज नहीं बांटा गया। मंहगाई के कारण लोग आत्महत्या करने को मजबूर हुए लोग 12 रूपये से 16 रूपये में जीवनयापन करने को मजबूर थे।

8.        कांग्रेस सरकार द्वारा दिल्ली में अनुसूचित जाति वर्ग के विकास पर खर्च होने वाला 667  करोड़ रुपया कॉमनवेल्थ गेम के नाम पर खर्च कर दिए गए।
शान्त प्रकाश जाटव

अनुसूचित जाति के युवाओं को किया जा रहा है षड्यंत्रकारी तरीके से गुमराह

1.        यूपी में प्रमोशन में आरक्षण का फैसला न होने के कारण कई लाख लोग सिर्फ मायावती के कारण रिवर्ट हुए

जिसके लिए एकमात्र दोषी मायावती है मायावती बताये क्यों ?

·         17.38 करोड़ रूपये लेकर भी सतीश मिश्रा ने पैरवी क्यों नहीं की परिणामतः मुकद्दमा ख़ारिज हुआ?

·         मायावती ने लखनऊ बैंच में पैरवी न किये जाने के कारण ख़ारिज हुए मुकद्दमें की इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील क्यों नहीं की ? वह सीधा सुप्रीम कोर्ट क्यों गई ? जहाँ सुप्रीम कोर्ट नें हाई कोर्ट जाने की सलाह देकर मुकद्दमा ख़ारिज किया।

·         मायावती नें 212 विधायक होने के बावजूद विधेयक पारित कर कानून क्यों नहीं बनाया ?

2.        मायावती दलित की बेटी के नाम पर राजनीति कर रही हैं तीन बार भाजपा के रहम पर मुख्यमंत्री बनीं हर बार धोका, दिया वही हाल अनुसूचित जाति समाज से भी किया। नेशनल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक दलित उत्पीडन की देश में औसतन 30 हज़ार घटनाएँ हर साल होती हैं मायावती के शासन में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अनुसार वर्ष 2007 में 6768, 2008 में 8074, 2009 में 7541 और 2010 में 7062  मामले दलित उत्पीडन के और 2007 में 319, 2008 में 255, 2009 में 265 और 2010 में 235 हत्या के मामले दर्ज हुए।
शान्त प्रकाश जाटव

3.        रोहित चक्रवर्ती वेमुला वामपंथी एक्टिविष्ट था वामपंथियों के इशारे पर उसने आतंकवादी याकूब मेनन को फाँसी दिए जाने के विरोध में विद्यालय परिसर में शोक सभा का आयोजन किया था, वो अपने साथियों के साथ अक्सर आतंकवादी याकूब मेनन के लिए नमाज़ पढ़ता था। जिसको विश्वविद्यालय प्रशासन नें गलत मानते हुए सभा कर रहे उसके साथी छात्रों को कुछ शर्तों के साथ निष्कासित किया, जाँच होने तक होस्टल खाली करना, वह बाहर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकता था। स्कालरशिप रोक दी गई, जिसका उसको कतई आभास नहीं था। उसके आकाओं नें भी उसकी मदद नहीं की सम्भवतः उसे उकसाया परिणाम स्वरूप सुसाईड नोट लिख कर उसने आत्महत्या कर ली। विभागीय जांच से पता चला है की वह पिछड़ी जाति से था, बसपाई, कांग्रेसी और वामपंथी उसे दलित बता  रहे हैं ताकि दलित हमेशा की तरह मूर्ख बनकर मूर्खता में उन्हें वोट दे !
शान्त प्रकाश जाटव

4. सुनपेड, हरियाणा में दो बच्चों को जिन्दा जलाने की  निर्मम घटना, पति पत्नी के आपसी झगड़े के कारण हुई फॉरेंसिक जाचं में मिट्टी के तेल की आधी भरी बोतल भी कमरे में पलँग के पास मिली। मगर बसपाई, कांग्रेसी और वामपंथी इसे दलित उत्पीड़न से जोड़कर दलितों के वोट की खातिर झूठ प्रचारित कर आक्रोश पैदा कर रहे है।
शान्त प्रकाश जाटव

5. उना गुजरात में दलित उत्पीड़न की घटना एक कांग्रेसी विधायक के ईशारे पर हुई जिसके लिए 600 किलोमीटर दूर दमन से नकली गौरक्षक आये जिन्होंने घटना को अंजाम दिया और जानबूझकर तनाव पैदा करने के उद्देश्य से घटना का वीडियो भी स्वयं बनाया जिसे दमन पहुंचकर उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रकाशित भी किया। अब वही कांग्रेसी, वामपंथी, बसपाई दलितों को वोट की खातिर गुमराह कर रहे हैं।
शान्त प्रकाश जाटव

Wednesday, August 31, 2016

हिंदुओं के एक वर्ग को षड्यंत्र स्वरूप वामपंथियों द्वारा अछूत कहा गया

हिंदुओं के एक वर्ग को षड्यंत्र स्वरूप वामपंथियों द्वारा अछूत कहा गया

एकनाथ, तुकाराम, रविदास जैसे अनेकों हिन्दू संत हुए जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
वेद आधारित आर्यसमाज में अनेक ब्राम्हण पुरोहित हुए हैं, जिनके पैर सभी हिन्दू छूते हैं जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
अनेक मंदिरों के ऐसे पुरोहित हैं,  जिनसे सभी हिन्दू आशीर्वाद लेते हैं, जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
हमारे यहाँ अनकोें राजा हुए हैं, जिनकी आधीनता सभी हिन्दुओं को स्वीकार्य थी, जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।

पुराने काल की बात करें तो

रामायण लिखने वाले महृषि वाल्मिकी, भगवान राम के भी पूज्य थे, जो लव - कुश के गुरु थे, आज भी पूज्य हैं,

महाभारत के लेखक वेदव्यास सबके पूज्य थे, आज भी पूज्य हैं,

भगवान बुद्ध, विष्णु भगवान के दसवें अवतार हैं,
उपरोक्त सभी को षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।

जबकि, एक हजार वर्ष भारत के शासक हिन्दू नहीं मुस्लिम थे,
दो सौ वर्ष भारत के शासक हिन्दू नहीं ईसाई थे,
1947 से अब तक, सेक्युलर व अछूतों के छद्म शुभचिन्तक बुद्धिजीवियों/ वामपंथियों/ समाजवादियों का शासन रहा है जिन्होनें खुद को अछूतों/ मजदूराें / किसानों का हमदर्द बताया, आप खुद तय करें अछूतों का असली शत्रु कौन है ?

छद्म दलित मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं, समाज को गुमराही के सिवा क्या मिला किसका कितना उत्थान हुआ ?
हजारों - करोड़ का लेदर इण्डस्ट्री को उनके मूल मालिकों से कैसे, किसने चालाकी से छीना ?
सीवेज ट्रीटमेण्ट की परिपाटी उनसे जबरन किसने करवाई ?

हरमों का अपशिष्ट जबरन किसने सिर पर उठवाया ?

पाकिस्तान व बांग्लादेश के अछूतों का,  किसने सफाया किया ?

जरा ठण्ढ़े दिमाग से सोचिये

आरक्षण व्यवस्था ने, क्या सब अछूतों को नौकरी दे दी ?
भीम के संविधान ने, क्या सभी अछूतों का उत्थान कर दिया ?
आज अछूतों के उत्थान न होने का जिम्मेवार अछूत स्वयं हैं।
क्योंकि अछूत उनके पीछे चलते हैं जो ईसाई और मुस्लिम देशों से पैसा लेकर इनको गुमराह करते हैं हिन्दुओं को शत्रु बताते हैं और दलित - मुस्लिम का गठजोड़ बनाते हैं।
सावधान कहीं उत्थान के बजाए सफाया न हो जाए ?
क्योंकि कश्मीर से केवल पंडित हीं नहीं अछूत भी साफ हो गए।

शान्त प्रकाश जाटव