Saturday, December 16, 2017

भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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 December 4, 2017 


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चमार रेजीमेंट के सैनिक चुन्नीलाल को पगड़ी बांधकर सम्मानित करते भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव


नई दिल्ली. 04 दिसंबर. अखिल भारतीय हिंदू जाटव महासभा के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी के नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुर्नस्थापना किये जाने तथा चमार रेजीमेंट के शहीद सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिये जाने की मांग दोहराई है.


प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र की प्रतिलिपि


जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट ने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आईएनए में शामिल होकर, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए उनके दांत खट्टे कर दिए थे. जिसके परिणामस्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु वह मांग कर रहे हैं. विदित हो कि श्री जाटव ने इसी मुद्दे को लेकर बीते 17 अक्टूबर 2015 को महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री तथा अन्य विभागों को पत्र लिखे थे, जिसके बाद तत्कालीन केन्द्रीय रक्षामन्त्री मनोहर पर्रिकर ने उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया था. इसी मामले को लेकर केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मार्च 2017 में रक्षा सचिव को तथा नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चमार रेजीमेंट को बहाल करने की मांग की है. यह भी पढ़ें : भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का मायावती के बयान पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप  भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री को यह स्मरण पत्र लिखकर याद दिलाते हुए कहा है, कि आजादी की लड़ाई में चमार रेजीमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे आग्रह है, कि वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये. साथ ही  चमार रेजीमेंट के ऐसे सैनिक जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिन्हें अंग्रेजों ने बागी घोषित कर 1943 में जेलों में यातनाएं दीं थीं, ऐसे सभी सैनिकों को राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये. 
इसके अलावा चमार रेजीमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व सभी जिलों में शौर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाने की भी मांग की है, ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को समझ सके. साथ ही श्री जाटव ने  चमार रेजीमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जाने का भी अनुरोध किया है. श्री जाटव ने पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट के इन वीर सैनिकों की वीरता और शहादत की कहानियां समाज को उनके पूर्वजों शौर्यगाथा से अवगत करायेंगी और मौजूदा पीढ़ी को पता चलेगा कि उनके समाज का कैसा गौरवशाली इतिहास रहा है.


Monday, December 04, 2017

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

शान्त प्रकाश जाटव       
भारतीय जनता पार्टी
पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी
अनुसूचित जाति मोर्चा

279, ज्ञान खंड 1, इंदिरा पुरम, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश 9871952799

प्रतिष्ठा में,                                              
आदरणीय श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी
माननीय प्रधानमन्त्री, भारत सरकार,
प्रधानमन्त्री कार्यालय, साउथ ब्लाक, नई दिल्ली – 110011

विषय: अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

मान्यवर,

वीर चमार रेजिमेंट जिसने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आई एन ए में शामिल हो, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर उनके दांत खट्टे कर दिए परिणाम स्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने का कदम उठाना पड़ा उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजिमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु हम वर्षों से मांग कर रहे हैं 17 अक्टूबर 2015 को मैंने महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री व् अन्य विभागों को पत्र लिखे थे. तदुपरांत केन्द्रीय रक्षामन्त्री द्वारा कार्यवाही हेतु आश्वासन मिला, केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग नें मार्च 2017 रक्षा सचिव को पत्र लिखा व् नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार नें भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा. आजादी की लड़ाई में चमार रेजिमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे पुन: विनम्र आग्रह है की

1.     वीर चमार रेजिमेंट की शीघ्र अति शीघ्र भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये.

2.     चमार रेजिमेंट के सेनिकों जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिनको अंग्रेजों नें बागी घोषित कर 1943 में जेलों में बंद कर यातनाएं दीं को सभी राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये.

3.     चमार रेजिमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व् समस्त जिलों में शोर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाएँ ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को जानें उनके देशभक्ति के जज्बे को समझे और फख्र करे.

4.     चमार रेजिमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल की जाये.

सादर

भवदीय

(शान्त प्रकाश जाटव)

Sunday, November 19, 2017

चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया। दिनाँक 18 नवम्बर 2017 जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा

चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया।
दिनाँक 18 नवम्बर 2017
जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा

Monday, November 13, 2017

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

Saturday, November 11, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें कौशाम्बी, गाज़ियाबाद में किया हवन का आयोजन दिनाँक 10 नवम्बर 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें कौशाम्बी, गाज़ियाबाद में किया हवन का आयोजन दिनाँक 10 नवम्बर 2017

Friday, October 27, 2017

भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का मायावती के बयान पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप

 

संवाददाता. 
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी और भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के उस बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने मौजूदा सरकार में दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपनाने की धमकी दी थी. मायावती के इस ताजा बयान पर निशाना साधते हुए शांत प्रकाश जाटव ने मायावती पर छल की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई तीखे हमले किए.
जाटव ने मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हुए मायावती ने सरकारी खजाने से अपनी मूर्तियां सार्वजनिक स्थानों पर लगवाकर समाज को छलने का काम किया. वहीं प्रमोशन में रिजर्वेशन केस में 17.38 करोड़ रुपए की फीस वकील सतीश मिश्रा को देने के बावजूद पैरोकारी के बगैर खारिज याचिका को उच्च न्यायालय की जगह सर्वोच्च न्यायालय में गलत तरीके से अपील डालकर समाज के सवा लाख कर्मचारियों को रिवर्ट करवाने का काम किया, तब उन्हें समाज का ख्याल नहीं आया. भाजपा नेता ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान अवैध धन का कचरा हो जाने तथा उत्तर प्रदेश चुनाव में हार के बाद मायावती पूरी तरह बौखला चुकी हैं और अनर्गल प्रलाप कर रही हैं. जाटव ने मायावती के हिंदू धर्म त्यागने के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अपनी अस्थिर हो चुकी राजनीति को स्थिर करने की जुगत में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अनुसूचित जाति वर्ग के कंधे पर बैठकर अजान लगाने का असफल प्रयास करने के बाद अब बुद्धिस्ट बनने की धमकी देकर समाज को छलने की असफल कोशिश कर रही हैं. शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि अनुसूचित समाज अब मायावती की असलियत को पहचान चुका है और उनके किसी भी झांसे में आने के लिए तैयार नहीं है.


Monday, October 23, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

Friday, October 13, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन दिनाँक 13 अक्टूबर 2017

Friday, October 06, 2017

मोदी जी वाराणसी में और हम तावडू गुरुग्राम में

मोदी जी वाराणसी में 22 सितम्बर 2017 और हम तावडू गुरुग्राम में अगस्त 2017 को गौसेवा ईश्वरीय सेवा

Wednesday, July 19, 2017

दलितों के कंधे पर बैठ अज़ान लगाने वाली मायावती सिर्फ नौटंकी कर रही हैं

भाजपा के वरिष्ठ नेता शांत प्रकाश जाटव ने कहा
की मायावती नौटंकी कर रही हैं वह इस्तीफा देतीं या ना देतीं उनकी सदस्यता तो वैसे भी खत्म होने वाली है. श्री जाटव ने कहा मायावती को लालू ने बिहार से राज्‍यसभा भेजने का वायदा किया था परन्‍तु अब लालू खुद उलझे हुए हैं वो बिना नितीश की सहमति के मायावती को राज्‍यसभा भेजने की स्‍थिति में नही है ऐसे में मायावती के समक्ष यही एक रास्‍ता बचता था.
उन्होंने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा बीएसपी प्रमुख मायावती कांग्रेस की एजेंट है बीएसपी कांग्रेस की बी टीम है जो दलितों की पीठ पर बैठ अज़ान लगाने का काम करती रही है। उन्होंने कहा मायावती कभी भी एक विशेष समुदाय के लोगो के खिलाफ नही बोली क्यों की वो समुदाय कांग्रेस का बड़ा बोट बैंक है, दलित समाज की बेटियों के साथ कई बार दुर्व्यवहार हुए पर मायावती कभी भी उनकी आवाज नही बनी, मायावती ने सहारनपुर में अंबेडकर जयंती शोभायात्रा पर भी 10 वर्ष पहले सिर्फ इसलिए रोक लगाई थी क्योंकी वहां के एक विशेष धर्म के कद्दावर नेता ने मायावती को मना किया था। उन्होंने सहारनपुर का जिक्र करते हुए कहा कि सहारनपुर में जो हिंसा हुई वो भी एक सोची समझी साजिश थी.
श्री जाटव ने चटकी लेते हुए कहा कि  मायावती का कहना है दलितों और छोटे तबकों के लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहा है. सहारनपुर में दलितों का बड़े पैमाने पर उत्पीड़न हुआ. गुजरात के ऊना में दलितों पर अत्याचार हुआ. मुझे शब्बीरपुर में हेलीकॉप्टर से जाने की इजाजत नहीं दी गई. मुझे सड़क के रास्ते जाना पड़ा. जब मैं गांव पहुंची तो डीएम और एसपी गायब थे. मैंने वहां कोई ऐसी बात नहीं कही जिससे समुदायों के बीच लड़ाई हो जाए. यूपी में अभी भी महाजंगलराज और महागुंडाराज है. हमें पीड़ितों की मदद के लिए भी प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ी. जबकि मायावती के टाइम में जो अत्याचार लोगो पर हुए वह भुलाये नही जा सकते। *बसपा के नारे तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार* इस नारे से ही समझा जा सकता है की मायावती कितनी घटिया स्तर की राजनीति करती रही है. चूंकि बसपा कांग्रेस की बी टीम है इसलिए आज तक मायावती ने कभी भी कांग्रेस के काले कारनामों के खिलाफ एक शब्द भी नही बोला। उन्होंने कहा की राष्ट्रपति चुनाव में मीरा कुमार का समर्थन कर ये बात साबित भी कर दी है। श्री जाटव ने कहा आज मायावती का इस्तीफा देना भी राजनीति से प्रेरित है उनका राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है. सदन में पुनः चुन कर आने लायक उनकी पार्टी के पास विधायक नहीं हैं बीएसपी की विधानसभा के भीतर ताकत महज 19 विधायकों की रह गई है. अब इतने कम विधायकों के नाम पर उनकी सदन के भीतर दोबारा इंट्री तो नामुमकिन ही थी. लिहाजा शहीद बनने का प्रयास कर भोले भाले गरीब दलितों को फिर गुमराह करने की कोशिश मायावती कर रही हैं.
उन्होंने कहा दरअसल, मायावती दलित राजनीति में बीजेपी द्वारा उठाये गए कदमों से परेशान है. गैर जाटव दलित समुदाय के रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद के लिए आगे बढ़ाकर बीजेपी यूपी समेत बाकी राज्यों में भी अपनी साख बढ़ा रही है और राजनीति के इस सियासी खेल में फिलहाल बाजी मारती दिख रही है.

Wednesday, March 08, 2017

श्रीकान्त शर्मा जी को नॉमिनेशन भरवाने के बाद कार्यालय के उद्घाटन के समय


श्रीमती चमेली देवी सोलंकी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, पलवल, हरियाणा नें मुझे शाल भेंट कर स्वागत किया


Chameli Devi Solanki, Jila Panchayat Adhyksh, Palwal नें पुष्प गुच्छ देकर मेरा स्वागत किया


Meeting with Youth Party workers at Palwal and Hodal, Distt Hariyana








Smt. Seema Upadhyay Secretary Delhi State BJP and Youth BJP leaders at 11 Ashok Road


जय भोले शंकर जय शिव शंकर














भाजपा नेता शान्त प्रकाश जाटव की मुहीम हुई कामयाब रक्षा मंत्री के बाद अनुसूचित जाति आयोग ने चमार रेजिमेंट बहाली के लिया संज्ञान

क्या ‘चमार रेजीमेंट’ फिर होगी बहाल, आयोग ने केंद्र को दिया नोटिस

Updated: February 28, 2017, 7:11 PM IST
   
क्‍या आपको पता है कि सेना में चमार रेजीमेंट भी थी, जो सिर्फ 3 साल ही अस्‍तित्‍व में रही. अब सेना में इस रेजीमेंट की बहाली के लिए पहली बार कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. इसकी मांग को लेकर होने वाले कुछ प्रदर्शनों की खबरों पर राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है.
आयोग के सदस्‍य ईश्‍वर सिंह ने रक्षा सचिव को नोटिस कर दिया है. दलितों का यह बड़ा मामला पहली बार इस स्‍तर पर उठाया जा रहा है. ईश्‍वर सिंह ने न्‍यूज 18 हिंदी डॉटकॉम से बातचीत में कहा कि आज ही सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है कि आखिर इस रेजीमेंट को किन कारणों से बंद किया गया.
ईश्‍वर सिंह का कहना है कि दलित किसी भी विषम परिस्‍थिति में रह लेता है. उतनी कठिनाई में शायद ही कोई और जीवन व्‍यतीत करता हो जितनी में ये लोग रहते हैं फिर भी इनकी रेजीमेंट सेना में बहाल क्‍यों नहीं की जा रही है. इस नोटिस के बाद नई बहस छिड़ने की उम्‍मीद है. आजादी के बाद से ही चमार रेजीमेंट बहाल किए जाने की आवाज कई बार उठाई गई, लेकिन आवाज दबकर रह गई. दलित इस रेजीमेंट को बहाल करने के लिए कई राज्‍यों में प्रदर्शन कर चुके हैं

ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि चमार रेजीमेंट थी तो उसे क्‍यों खत्‍म किया गया. बीजेपी अनुसूचित मोर्चा 
से जुड़े दलित नेता शान्त प्रकाश जाटव ने अक्‍टूबर 2015 में केंद्र सरकार से इस रेजीमेंट की बहाली की मांग 
की थी. उनका दावा है कि इसी मांग पर नवंबर 2015 में पर्रिकर ने लिखा था कि ‘मामले की जांच करवा रहा हूं’.
चमार रेजीमेंट का इतिहास
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेज सरकार ने थलसेना में चमार रेजीमेंट बनार्ई थी, जो 1943 से 1946 तक अस्तित्व में रही. दलितों के कल्‍याण से जुड़े संगठनों एवं जाटव का दावा है कि वीर चमार रेजीमेंट को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था. रक्षा मंत्री को लिखे पत्र में दावा किया गया है कि अंग्रेजों ने चमार रेजीमेंट को आजाद हिंद फौज से मुकाबला करने के लिए अंग्रेजों ने सिंगापुर भेजा. इस रेजीमेंट का नेतृत्व कैप्टन मोहनलाल कुरील ने किया था.
जहां कैप्टन कुरील ने देखा कि अंग्रेज चमार रेजीमेंट के सैनिकों के हाथों अपने ही देशवासियों को मरवा रहे हैं. उन्‍होंने चमार रेजीमेंट को आईएनए में शामिल कर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने का निर्णय लिया. इसके बाद अंग्रेजों नें 1946 में चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया.
चमार रेजीमेंट के बचे सिपाही, फोटो: सतनाम सिंह
अंग्रेजों से युद्ध के दौरान चमार रेजीमेंट के सैकड़ों सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी. कुछ म्यांमार व थाईलेंड के जंगलों में भटक गए. जो पकड़े गए उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. कैप्टन मोहनलाल कुरील को भी युद्धबंदी बना लिया गया. जिन्हें आजादी के बाद रिहा किया गया. वह 1952 में उन्नाव की सफीपुर विधान सभा से विधायक भी रहे.
रेजीमेंट पर लिखी गई है किताब
हवलदार सुलतान सिंह ने ‘चमार रेजीमेंट और अनुसूचित जातियों की सेना में भागीदारी’ शीर्षक से किताब लिखी. दूसरी किताब सतनाम सिंह ने ‘चमार रेजीमेंट और उसके बहादुर सैनिकों के विद्रोह की कहानी उन्‍हीं की जुबानी’ नाम से लिखी.
इस समय सेना में मराठा लाइट इन्फेंट्री, राजपूताना राइफल्स, राजपूत रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, डोगरा रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट, गोरखा रेजीमेंट है.
चमार रेजीमेंट पर जेएनयू ने शुरू कराया रिसर्च
-‘चमार रेजीमेंट और उसके बहादुर सैनिकों के विद्रोह की कहानी उन्‍हीं की जुबानी’ नामक किताब के लेखक सतनाम सिंह जेएनयू में इस रेजीमेंट पर शोध कर रहे हैं. सिंह ने न्‍यूज 18 हिंदी डॉटकॉम से बातचीत में बताया इस रेजीमेंट के तीन सैनिक अभी जिंदा हैं. इसके सैनिक रहे चुन्‍नीलाल हरियाणा के महेंद्रगढ़, जोगीराम भिवानी और धर्मसिंह सोनीपत के रहने वाले हैं.
तीन माह पहले जेएनयू के मॉडर्न हिस्‍ट्री डिपार्टमेंट में रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. इसका विषय ‘ब्रिटिश कालीन भारतीय सेना की संरचना में चमार रेजीमेंट एक ऐतिहासिक अध्‍ययन’ है. यह रेजीमेंट भी उतनी ही बड़ी थी जितनी और जातियों के नाम पर बनी रेजीमेंट.




Tuesday, December 13, 2016

100 वर्षों में दिल्ली नें बदले प्यार

पिछले सौ सालों में दिल्ली अवधियों की मोहब्बत में डूबी पंजाबियों के आगोश में पली अब मिथला मगधियों की हो गई है।

Monday, December 12, 2016

एक और कांग्रेसी घोटाले की बू आ रही है

मुझे 14.50 लाख करोड़ से ज्यादा नोट जमा होने की आशंका लग रही है, एक और कांग्रेसी घोटाले की बू ! काश यह वहम निकले नहीं तो भूकम्प आ जायेगा।

Friday, November 04, 2016

आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे हैं केजरीवाल

आत्महत्या कानूनन अपराध है और उसे शहीद कहकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा एक करोड़ रूपये का सम्मान देकर समाज को प्रेरित करना क्या उससे बड़ा अपराध नहीं है ?

पत्रकारिता का गिरता स्तर

पत्रकारिता का अर्थ खबर प्रकाशित करना है उसे अच्छा या बुरा समझना पाठक का काम है, अपुष्ट विचार पाठक के दिमाग में भरना पत्रकारिता नहीं है।

Saturday, October 22, 2016

सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था


सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था

विवाद क्यों पैदा हुआ था:-

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था, यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। "बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है अधर्म है
"(भवान् निवेशय प्रथमं) मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है,अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नि कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नि बताया हो?
उत्तर:-(1) द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?
आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।- (विराट १८/१)
द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।

(2) वह भीम से कहती है - जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों, जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-
भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)
द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं, फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं वह मैं दुःखी हूँ पर होते तब ना।

(3) जब भीम ने द्रौपदी को, कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था,"जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था, जिसने मेरे भाई की पत्नि का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

(4) द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया।उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था। क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था,"जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)
ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नि का स्वामी रहता है।
यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं।यदि द्रौपदी पाँच की पत्नि होती तो वह, बजाय चुप हो जाने के पूछती, जब मैं पाँच की पत्नि थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि"पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है?यह न्यायविरुद्ध है।"

स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नि होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो पर है तो इसका स्वामी ही और नियम बता दिया "जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।"

(5) द्रौपदी कहती है- कौरवो, मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूँ तथा उनके ही समान वर्ण वाली हूँ।

सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था


सिर्फ युधिष्टर ही द्रौपदी का पति था

विवाद क्यों पैदा हुआ था:-

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था, यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। "बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है अधर्म है
"(भवान् निवेशय प्रथमं) मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है,अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नि कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नि बताया हो?
उत्तर:-(1) द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?
आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।- (विराट १८/१)
द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।

(2) वह भीम से कहती है - जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों, जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-
भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)
द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं, फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं वह मैं दुःखी हूँ पर होते तब ना।

(3) जब भीम ने द्रौपदी को, कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था,"जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था, जिसने मेरे भाई की पत्नि का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

(4) द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया।उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था। क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था,"जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)
ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नि का स्वामी रहता है।
यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं।यदि द्रौपदी पाँच की पत्नि होती तो वह, बजाय चुप हो जाने के पूछती, जब मैं पाँच की पत्नि थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि"पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है?यह न्यायविरुद्ध है।"

स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नि होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो पर है तो इसका स्वामी ही और नियम बता दिया "जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।"

(5) द्रौपदी कहती है- कौरवो, मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूँ तथा उनके ही समान वर्ण वाली हूँ।