Friday, October 30, 2026

होमगार्ड मॉडल बिल में संशोधन सुझाव

होमगार्डों को कब मिलेगा सम्मानजनक जीवन और कर्मचारी का दर्जा? समय की मांग है राष्ट्रीय मॉडल होमगार्ड विधेयक में व्यापक संशोधन

शांत प्रकाश जाटव
राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता मजदूर संघ (BJMS)

भारत के होमगार्ड देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार अंग हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात नियंत्रण, चुनाव ड्यूटी, आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा, धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों तथा विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों में होमगार्ड जवान पुलिस और प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सेवाएं देते हैं।

लेकिन एक बड़ा सवाल आज भी देश के सामने खड़ा है कि जिस होमगार्ड जवान से सरकार आवश्यकता पड़ने पर पुलिस के समान जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा करती है, उसे सम्मानजनक वेतन, स्थायी आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलनी चाहिए?

वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद भी बड़ी संख्या में होमगार्ड जवानों का भविष्य ड्यूटी मिलने या न मिलने पर निर्भर रहता है। कई राज्यों में उन्हें नियमित रोजगार की गारंटी नहीं है। ड्यूटी भत्ते में असमानता, भुगतान में देरी, दुर्घटना बीमा, चिकित्सा सुविधा, वृद्धावस्था में आर्थिक संरक्षण और सेवा समाप्ति के बाद आजीविका जैसे गंभीर प्रश्न आज भी बने हुए हैं।

यह केवल मानदेय बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले लाखों परिवारों के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

होमगार्ड व्यवस्था में अब नीतिगत बदलाव आवश्यक

होमगार्डों की स्थापना का मूल उद्देश्य नागरिक सुरक्षा एवं प्रशासन को सहयोग प्रदान करना था। लेकिन समय के साथ उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों में व्यापक परिवर्तन हुआ है।

आज अनेक स्थानों पर होमगार्ड नियमित प्रकृति की ड्यूटी करते हैं। वे यातायात व्यवस्था संभालते हैं, पुलिस के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखते हैं, चुनावों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर नागरिकों की सहायता करते हैं।

जब कार्य की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, तो उनकी सेवा शर्तों और कल्याणकारी व्यवस्था में भी उसी अनुपात में सुधार होना चाहिए।

होमगार्डों को वर्षों तक केवल स्वयंसेवक अथवा ड्यूटी भत्ता प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में रखकर उनकी वास्तविक कार्य-प्रकृति और सेवा परिस्थितियों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

हमारा मानना है कि जिन होमगार्डों से नियमित एवं पूर्णकालिक प्रकृति की सेवाएं ली जा रही हैं, उनकी सेवा स्थिति का निष्पक्ष मूल्यांकन कर उन्हें लागू कानूनों के अनुरूप कर्मचारी का दर्जा और उचित सेवा सुरक्षा प्रदान करने की राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए।

भारतीय जनता मजदूर संघ ने देशव्यापी स्तर पर उठाई होमगार्डों की आवाज

भारतीय जनता मजदूर संघ (BJMS) ने होमगार्डों की समस्याओं को केवल किसी एक राज्य अथवा क्षेत्र का विषय न मानकर राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बनाया है।

संगठन ने देशभर के होमगार्डों को जागरूक करने, उनकी समस्याओं को एकजुट करने और केंद्र सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया।

इस अभियान के अंतर्गत उपलब्ध संगठनात्मक विवरण के अनुसार लगभग सात लाख होमगार्डों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को तीन-तीन पत्र भेजने की पहल की गई। इस प्रकार लगभग 21 लाख पत्रों के माध्यम से होमगार्डों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया।

इस अभियान का उद्देश्य केवल आर्थिक मांग रखना नहीं था, बल्कि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना था कि होमगार्डों की सेवा व्यवस्था में व्यापक वैधानिक और नीतिगत सुधार की आवश्यकता है।

भारतीय जनता मजदूर संघ का स्पष्ट मत है कि होमगार्डों को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय और वेतन का प्रश्न

होमगार्डों के आर्थिक अधिकारों के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का 11 मार्च 2015 का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Grah Rakshak, Home Guards Welfare Association बनाम State of Himachal Pradesh एवं अन्य, सिविल अपील संख्या 2759/2015 तथा संबंधित मामलों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने होमगार्डों के ड्यूटी भत्ते और राज्य पुलिस के न्यूनतम वेतन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देशात्मक टिप्पणियां की थीं।

इस निर्णय के आलोक में संबंधित राज्यों को होमगार्डों के ड्यूटी भत्ते की व्यवस्था और पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के साथ उसके संबंध की समीक्षा करनी चाहिए।

हमारी मांग है कि इस निर्णय और उसके बाद लागू न्यायिक आदेशों का वास्तविक दायरे के अनुरूप प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

जहां होमगार्ड पुलिस कर्मियों के समान अथवा तुलनीय जिम्मेदारियां निभाते हैं और लागू कानूनी मानदंड समानता का आधार प्रदान करते हैं, वहां उन्हें संबंधित पुलिस पद के न्यूनतम वेतन के अनुरूप आर्थिक लाभ दिया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त महंगाई भत्ता, जोखिम भत्ता, रात्रि ड्यूटी भत्ता, अतिरिक्त ड्यूटी भुगतान और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में भी स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनाई जानी चाहिए।

राष्ट्रीय मॉडल होमगार्ड विधेयक में व्यापक संशोधन की आवश्यकता

आज सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता यह है कि राष्ट्रीय मॉडल होमगार्ड विधेयक को केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे होमगार्डों के अधिकारों और कल्याण का प्रभावी कानूनी आधार बनाया जाए।

भारतीय जनता मजदूर संघ ने केंद्रीय गृह मंत्री को विस्तृत सुझाव एवं मांग-पत्र प्रस्तुत करते हुए विधेयक में निम्नलिखित प्रमुख सुधारों की मांग की है:

1. कर्मचारी का दर्जा: लंबे समय से सेवा दे रहे और नियमित प्रकृति की ड्यूटी करने वाले पात्र होमगार्डों की वास्तविक कार्य परिस्थितियों के आधार पर उन्हें कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था बनाई जाए।

2. पुलिस के न्यूनतम वेतन के अनुरूप भुगतान: लागू न्यायिक निर्णयों और समान कार्य के सिद्धांत के अनुरूप पात्र होमगार्डों को सम्मानजनक वेतन एवं आर्थिक लाभ सुनिश्चित किए जाएं।

3. सेवा सुरक्षा: लंबे समय तक सेवा देने वाले होमगार्डों को बिना उचित कारण ड्यूटी से हटाने अथवा सेवा समाप्त करने के विरुद्ध पारदर्शी एवं न्यायसंगत प्रक्रिया बनाई जाए।

4. नियमित नियुक्ति के अवसर: जिन होमगार्डों की सेवाएं नियमित एवं पूर्णकालिक प्रकृति की हैं, उन्हें उपलब्ध पदों, पात्रता और भर्ती नियमों के अनुरूप नियमित नियुक्ति अथवा उपयुक्त सेवा व्यवस्था के अवसर दिए जाएं।

5. सामाजिक सुरक्षा: पात्रता के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।

6. दुर्घटना बीमा एवं चिकित्सा सुविधा: ड्यूटी के दौरान दुर्घटना, गंभीर चोट, स्थायी दिव्यांगता अथवा मृत्यु की स्थिति में होमगार्ड और उनके परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिले। चिकित्सा सुरक्षा की भी प्रभावी व्यवस्था हो।

7. वृद्धावस्था में आर्थिक संरक्षण: लंबे समय तक राष्ट्र की सेवा करने वाले होमगार्डों के लिए पेंशन, अंशदायी सेवानिवृत्ति योजना अथवा अन्य उपयुक्त आर्थिक संरक्षण की व्यवस्था विकसित की जाए।

8. महिला होमगार्डों का संरक्षण: महिला होमगार्डों को सुरक्षित कार्यस्थल, मातृत्व संबंधी वैधानिक लाभ, रात्रि ड्यूटी में सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।

9. प्रशिक्षण एवं कौशल विकास: आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, यातायात नियंत्रण और तकनीकी प्रशिक्षण की नियमित व्यवस्था हो।

10. शिकायत निवारण एवं जवाबदेही: ड्यूटी आवंटन, भुगतान, सेवा समाप्ति और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।

राज्यों के बीच असमानता समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम मानक बनें

वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में होमगार्डों की सेवा शर्तों, ड्यूटी भत्तों, सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं में काफी अंतर देखने को मिलता है।

एक ही प्रकार की जिम्मेदारी निभाने वाले होमगार्डों को अलग-अलग राज्यों में अलग आर्थिक सुविधाएं मिलना चिंता का विषय है।

हमारा सुझाव है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से होमगार्डों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम कल्याणकारी मानक तैयार करे।

इन मानकों में ड्यूटी भत्ता, भुगतान की समय-सीमा, दुर्घटना बीमा, चिकित्सा सहायता, सेवा रिकॉर्ड, शिकायत निवारण और वृद्धावस्था संरक्षण जैसे विषय शामिल होने चाहिए।

इसके लिए राष्ट्रीय होमगार्ड कल्याण परिषद अथवा उपयुक्त राष्ट्रीय परामर्श तंत्र भी स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, होमगार्ड प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और विषय विशेषज्ञों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

यह सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन का भी प्रश्न है

भारतीय संविधान समानता, गरिमापूर्ण जीवन, आजीविका और श्रमिक कल्याण की भावना को महत्व देता है।

संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 समानता और अवसर के सिद्धांतों से संबंधित हैं। अनुच्छेद 21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण करता है। वहीं अनुच्छेद 38, 39, 41, 42 और 43 राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय तथा श्रमिक कल्याण की दिशा में नीतियां बनाने का मार्गदर्शन देते हैं।

इन संवैधानिक उद्देश्यों के अनुरूप होमगार्डों की सेवा परिस्थितियों का मूल्यांकन और उनके कल्याण के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाना आवश्यक है।

राष्ट्र की सेवा करने वाले व्यक्ति को अपने परिवार के भविष्य की चिंता में जीवन नहीं बिताना चाहिए। उसे यह भरोसा होना चाहिए कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर उसका परिवार असहाय नहीं रहेगा और वर्षों की सेवा के बाद वृद्धावस्था में उसे सम्मानजनक आर्थिक संरक्षण मिलेगा।

केंद्र सरकार से हमारी प्रमुख अपेक्षाएं

भारतीय जनता मजदूर संघ ने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री जी के समक्ष अपने विस्तृत सुझाव एवं मांग-पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है कि:

  • राष्ट्रीय मॉडल होमगार्ड विधेयक में व्यापक कल्याणकारी संशोधन किए जाएं।
  • पात्र होमगार्डों को कर्मचारी का दर्जा देने के लिए स्पष्ट वैधानिक प्रावधान बनाए जाएं।
  • सुप्रीम कोर्ट के लागू निर्णयों के अनुरूप ड्यूटी भत्ते एवं वेतन संबंधी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • लंबे समय से सेवा दे रहे होमगार्डों के लिए सेवा सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण की नीति बनाई जाए।
  • दुर्घटना बीमा, चिकित्सा सुविधा, सामाजिक सुरक्षा और वृद्धावस्था संरक्षण को कानूनी एवं नीतिगत आधार दिया जाए।
  • होमगार्डों के प्रतिनिधियों एवं संबंधित संगठनों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर परामर्श बैठक आयोजित की जाए।
  • संगठन द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक महत्वपूर्ण सुझाव पर बिंदुवार विचार कर कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराया जाए।

हमारा आग्रह है कि इस विषय को केवल प्रशासनिक या वित्तीय बोझ के दृष्टिकोण से न देखा जाए। होमगार्डों के कल्याण पर किया गया व्यय वास्तव में देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और लाखों परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में निवेश है।

हमारा संकल्प : होमगार्डों को सम्मान, सुरक्षा और अधिकार

भारतीय जनता मजदूर संघ का उद्देश्य सरकार और श्रमिकों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करना है। हमारा विश्वास है कि उद्योग, प्रशासन, श्रमिक और राष्ट्र के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

हम किसी टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं करते। हम संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और नीतिगत सुधारों के माध्यम से समस्याओं का समाधान चाहते हैं।

होमगार्डों को उनका उचित अधिकार दिलाना केवल एक संगठन की मांग नहीं, बल्कि उन लाखों जवानों के सम्मान का विषय है जो कठिन परिस्थितियों में देश और समाज की सेवा करते हैं।

आज आवश्यकता है कि सरकार उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों और वर्षों के योगदान को ध्यान में रखते हुए ऐसा राष्ट्रीय कानून बनाए, जो उन्हें आर्थिक सम्मान, सेवा सुरक्षा और भविष्य की गारंटी देने की दिशा में प्रभावी साबित हो।

हमारा स्पष्ट संदेश है—

जो जवान देश की सुरक्षा में अपना योगदान देता है, उसके परिवार की सुरक्षा और उसके भविष्य की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी सरकार और व्यवस्था का दायित्व है।

होमगार्डों को सम्मान मिले, उचित वेतन मिले, कर्मचारी संबंधी अधिकार मिलें और उनके परिवारों को सुरक्षित भविष्य मिले। यही समय की मांग है।

शांत प्रकाश जाटव
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारतीय जनता मजदूर संघ (BJMS)

राष्ट्र के लिए करेंगे काम, नहीं करेंगे चक्का जाम।

Save Industry, Save Your Future.

No comments:

Post a Comment