Monday, June 22, 2026

योग: साधना, विज्ञान और भारत की वैश्विक सांस्कृतिक विजय



लेखक: शांत प्रकाश जाटव

राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता मजदूर संघ

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर कुछ राजनीतिक और वैचारिक समूह यह प्रचारित करते हैं कि योग का वैश्विक विस्तार केवल एक "पीआर अभियान" या "सरकारी तमाशा" है। यह दृष्टिकोण न केवल अधूरा है, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और उसकी आधुनिक वैश्विक उपलब्धियों को भी नजरअंदाज करता है।

सच्चाई यह है कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अमूल्य धरोहर है। महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित स्वरूप दिया, जबकि आधुनिक काल में स्वामी विवेकानंद, स्वामी शिवानंद, बी.के.एस. अयंगर, परमहंस योगानंद और अनेक योगाचार्यों ने इसे विश्व तक पहुंचाया। स्वतंत्र भारत में विभिन्न सरकारों ने योग के विकास में योगदान दिया, लेकिन 21वीं सदी में योग को वैश्विक जनआंदोलन बनाने का कार्य अभूतपूर्व स्तर पर हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की ऐतिहासिक जीत

27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा। मात्र 75 दिनों के भीतर 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 177 देशों के समर्थन से 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" घोषित कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में किसी सांस्कृतिक प्रस्ताव को इतनी बड़ी संख्या में देशों का समर्थन मिलना एक असाधारण उपलब्धि थी। आज विश्व के 190 से अधिक देशों में योग दिवस आयोजित किया जाता है और करोड़ों लोग इसमें भाग लेते हैं।

क्या योग केवल एक कार्यक्रम है?

योग को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित करके देखना गलत है। योग आज भारत के स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सेना, पुलिस, खेल संस्थानों, कॉरपोरेट जगत और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच चुका है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार देशभर में हजारों योग प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। लाखों लोगों ने योग प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRYN) जैसे संस्थान योग के वैज्ञानिक अध्ययन और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार

योग के विरोध में यह तर्क दिया जाता है कि सरकार केवल योग का प्रचार करती है और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान नहीं देती। लेकिन आंकड़े इसके विपरीत तस्वीर पेश करते हैं।

AIIMS का विस्तार

2014 तक देश में केवल 7 AIIMS कार्यरत थे। आज 22 से अधिक AIIMS कार्यरत या शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल हैं, जबकि कई अन्य विभिन्न चरणों में हैं।

मेडिकल कॉलेजों में वृद्धि

  • वर्ष 2014 में देश में लगभग 387 मेडिकल कॉलेज थे।
  • वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 780 से अधिक हो चुकी है।

अर्थात मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

MBBS सीटों में वृद्धि

  • 2014 में लगभग 51,000 MBBS सीटें थीं।
  • 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.18 लाख से अधिक हो गई।

यानी 130% से अधिक वृद्धि।

PG मेडिकल सीटों में वृद्धि

  • 2014 में लगभग 31,000 PG सीटें थीं।
  • आज यह संख्या 74,000 से अधिक है।

आयुष्मान भारत

आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 12 करोड़ परिवारों को प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है। करोड़ों मरीज इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।

स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र

देशभर में 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं।

योग और वैज्ञानिक अनुसंधान

कुछ लोग दावा करते हैं कि पूर्व में योग पर वैज्ञानिक अनुसंधान होता था जबकि आज केवल प्रचार हो रहा है। वास्तविकता यह है कि आज योग अनुसंधान पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक स्तर पर हो रहा है।

प्रमुख संस्थान

  • मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (नई दिल्ली)
  • केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRYN)
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विभिन्न शोध विभाग
  • आयुष मंत्रालय के अधीन अनेक अनुसंधान परियोजनाएं

आज मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अवसाद, मोटापा, अनिद्रा और जीवनशैली संबंधी रोगों पर योग आधारित अनुसंधान देश और विदेश में चल रहे हैं।

योग ने रोजगार के नए अवसर दिए

योग का वैश्विक विस्तार केवल सांस्कृतिक उपलब्धि नहीं बल्कि आर्थिक अवसर भी है।

भारत का वेलनेस और योग उद्योग अरबों डॉलर का क्षेत्र बन चुका है। आज हजारों योग प्रशिक्षक, आयुष चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, फिटनेस कोच और वेलनेस सलाहकार इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

विश्व के अनेक देशों में भारतीय योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ी है। योग पर्यटन, वेलनेस रिट्रीट और आयुष आधारित सेवाओं ने लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है।

योग और भारत की सॉफ्ट पावर

दुनिया के शक्तिशाली देश अपनी संस्कृति के माध्यम से प्रभाव बढ़ाते हैं।

  • अमेरिका हॉलीवुड और अंग्रेजी भाषा के माध्यम से।
  • चीन कन्फ्यूशियस संस्थानों के माध्यम से।
  • फ्रांस अपनी भाषा और संस्कृति के माध्यम से।

भारत ने योग के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच पर स्थापित किया है। आज जब न्यूयॉर्क, पेरिस, लंदन, टोक्यो, मॉस्को, सिडनी और दुबई में लाखों लोग योग करते हैं तो यह केवल स्वास्थ्य गतिविधि नहीं बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन भी है।

योग किसी दल का नहीं, भारत का है

योग न कांग्रेस का है, न भाजपा का। योग न वामपंथ का है, न दक्षिणपंथ का। योग भारत की आत्मा का हिस्सा है।

नेहरू काल, इंदिरा गांधी काल, मोरारजी देसाई काल और बाद की विभिन्न सरकारों ने योग के विकास में योगदान दिया। उस योगदान का सम्मान होना चाहिए। लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार करना होगा कि 2014 के बाद योग को जो वैश्विक पहचान मिली, वह भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

निष्कर्ष

यदि किसी नीति की सफलता का मापदंड केवल आलोचना हो, तो कोई भी उपलब्धि स्वीकार नहीं की जाएगी। लेकिन तथ्य बताते हैं कि आज योग विश्वव्यापी जनआंदोलन बन चुका है। स्वास्थ्य क्षेत्र में AIIMS, मेडिकल कॉलेजों, MBBS सीटों, आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार हुआ है। योग अनुसंधान, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा विश्व मंच पर मजबूत हुई है।

इसलिए योग को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय भारत की सभ्यता, स्वास्थ्य और मानव कल्याण के व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए।

योग तमाशा नहीं, भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।
योग केवल आसन नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, स्वास्थ्य और मानवता के कल्याण का मार्ग है।

— शांत प्रकाश जाटव
राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता मजदूर संघ

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