Saturday, November 19, 2022
"राष्ट्र के लिए करेंगे काम नहीं करेंगे चक्का जाम"
Saturday, May 28, 2022
भाजपा शासन ने देश को अब तक 20 आयुर्विज्ञान संस्थान दिए हैं मुझे फख्र है - शान्त प्रकाश जाटव
Thursday, November 19, 2020
"जातीय अस्पृश्यता वैदिक नहीं औपनिवेशिक षड्यंत्र"
Thursday, August 30, 2018
भीमा कोरेगांव राष्ट्र विरोधियों का शौर्य प्रतीक है राष्ट्रवादी इसकी सच्चाई को समझें
चमार और महार समुदाय का बुनियादी फर्क सामने आया, चमार रेजीमेंट के शौर्य की इबारत शौर्य दिवस के मुकाबले कहीं ज्यादा चमकीली
नई दिल्ली. 03 जनवरी. भीमा कोरेगांव में शौर्य प्रदर्शन के कार्यक्रम में हंगामे पर रोष व्यक्त करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता तथा अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव ने कहा है, कि ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ मिलकर 1818 में जहां महार सैनिकों ने भारत में अंग्रेजों को मजबूत किया था, वहीं 1943 में आजाद हिंद फौज के नेतृत्व में लड़ी चमार रेजीमेंट ने अंग्रेजों के दांत खट्टे करते हुए वीरता की नई इबारत लिखी थी. जाटव ने कहा कि महार और चमार समुदाय के बीच का यह बुनियादी फर्क आज भी देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर देश का चमार समुदाय राष्ट्रहित में देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, वहीं महार समुदाय आज भी 200 वर्ष पुरानी उस दासता को शौर्य के नाम पर ढोने का कोशिश कर रहा है, जो शौर्य उनका न होकर अंग्रेजों का था. उन्होंने कहा कि भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद एक बार फिर चमार और महार समुदाय का बुनियादी फर्क सामने आ गया है तथा चमार रेजीमेंट के शौर्य की इबारत शौर्य दिवस के मुकाबले कहीं ज्यादा चमकीली है. शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि कोरेगांव युद्ध को जो महार जाति अपनी अस्मिता के साथ जोड़ती है, वह यह क्यूं भूल जाती है, कि ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज के ये महार सैनिक अपने लिए नहीं बल्कि अंग्रेजों के लिए लड़े थे. देश में चमार रेजीमेंट की बहाली की लड़ाई लड़ रहे जाटव ने कहा कि कैसा दुर्भाग्य है, कि देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़े लोग शौर्य दिवस मना रहे हैं, जबकि देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली वीर चमार रेजीमेंट के सैनिकों की वीरता और रेजीमेंट की बहाली और उसके सम्मान के लिए उन्हें देश में ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है.
गौरतलब है, कि भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने अक्टूबर 2015 में केंद्र सरकार से इस रेजीमेंट की बहाली की मांग की थी. उनकी इस मांग पर नवंबर 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लिखा था कि वह मामले की जांच करवायेंगे.
जाटव ने कहा कि वह चाहते हैं, कि हर देशवासी इस बात को समझ ले कि
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वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि अब यह देश को तय करना है, कि अंग्रेजों की चाकरी और चाटुकारिता करने वाले लोग देश के आदर्श होंगे या फिर हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ने वाले चमार रेजीमेंट के वे वीर सैनिक जिन्होंने देश की आन-बान-शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था.
Tuesday, May 01, 2018
भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव की सरकारी संस्थानों, स्मारकों व पार्कों से दलित शब्द हटाने की मांग, कहा दलित शब्द से बिगड़ती है देश की छवि
संवाददाता.
नई दिल्ली. 30 अप्रैल. सरकारी प्रतिष्ठानों तथा सार्वजनिक कार्यों में डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का पूरा नाम लिखे जाने की सफल मुहिम चला चुके वरिष्ठ भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने अब सार्वजनिक स्थलों पर दलित शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री से इस पर रोक लगाने की मांग की है. जाटव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है, कि जिन सरकारी संस्थानों, स्मारकों व पार्कों के नाम में दलित शब्द जुड़ा है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, लज्जाजनक व शर्मनाक है.
shant prakash jatav, BJP Leader
भाजपा नेता ने कहा है, कि इससे भारत की छवि बिगड़ती है, इसको तुरंत हटाया जाए. जाटव ने प्रधानमंत्री के नाम लिखे इस पत्र में कहा है, कि उत्तर प्रदेश लगभग 22 करोड़ आबादी का सबसे बड़ा प्रदेश है. यहां विभिन्न जाति-धर्म के लोग रहते हैं. इस कारण से राजनीतिक दलों व राजनीतिज्ञों के रडार पर उत्तर प्रदेश हमेशा रहा है. और यही कारण है, कि जो भी सरकारें उत्तर प्रदेश में शासन करने आती हैं, वह अपने तरीके से इस प्रदेश पर अपने कार्य की छाप छोड़ने का प्रयास करती हैं, जो कि अच्छा भी है. इससे प्रदेश का आमूलचूल विकास होता है और साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व बढ़ता है. यह भी पढ़ें : लालकिले के रखरखाव पर ओछी सियासत और स्तरहीन पत्रकारिता..! पत्र में लिखा है, कि उसी श्रेणी में एक सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पार्कों के निर्माण किए गए, जिनके नामकरण में दलित शब्द का जमकर उपयोग किया गया. एक पार्क दलित प्रेरणा स्थल हो सकता है यह अपने आप में विचारणीय विषय है. एक वर्ग को दलित कहकर की जाने वाली घिनौनी राजनीति का परिचायक है. जाटव ने लिखा है, कि एक स्वस्थ सामाजिक इंसान स्वयं को दलित कहकर समाज में मानसिक रूप से भी श्रेष्ठ नहीं हो सकता. स्वयं को दलित कहना जीते जी आत्महत्या करने के समान है.
उन्होंने लिखा है, कि राजनीति के लिए इस शब्द का जमकर दुरुपयोग हो रहा है. अमेरिका में रहने वाला भारतीय नागरिक भी स्वयं को दलित भारतीय कहकर भारत को वहां लज्जित कर रहा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.
शांत प्रकाश जाटव ने सरकारी स्मारकों व पार्कों में लिखे जाने वाले दलित शब्द को तुरंत प्रभाव से हटाये जाने की मांग करते हुए लिखा है, कि ऐसे तमाम पार्क और स्मारक जिनके नाम के आगे दलित शब्द लिखा है, हिंदुस्तान को शर्मसार व लज्जित कर रहे हैं. एक सभ्य समाज में रहने वाला इंसान जो अनुसूचित जाति वर्ग से है वह इन स्थलों को देख कर असहज हो जाता है
Monday, April 30, 2018
खुद को दलित कहना आत्महत्या करने के समान है
प्रतिष्ठा में,
आदरणीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
विषय - सरकारी संस्थानों स्मारकों व पार्कों के नाम में से दलित शब्द हटाने हेतु आग्रह पत्र
मान्यवर
उत्तर प्रदेश लगभग 22 करोड़ आबादी का सबसे बड़ा प्रदेश है यहां विभिन्न जाति धर्म के लोग रहते हैं इस कारण से राजनीतिक दलों व राजनीतिज्ञों के रडार पर उत्तर प्रदेश हमेशा रहा है और यही कारण है कि जो जो सरकारें उत्तर प्रदेश में शासन करने आती है वह अपने तरीके से इस प्रदेश पर अपने कार्य की छाप छोड़ने का प्रयास करती है जो कि अच्छा भी है। इससे प्रदेश का आमूलचूल विकास होता है और साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व बढ़ता है।
उसी श्रेणी में एक सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पार्कों के निर्माण किए गए जिनके नामकरण में दलित शब्द का जमकर उपयोग किया गया। एक पार्क दलित प्रेरणा स्थल हो सकता है यह अपने आप में विचारणीय विषय है एक वर्ग को दलित कहकर की जाने वाली घिनौनी राजनीति का परिचायक है। एक स्वस्थ सामाजिक इंसान स्वयं को दलित कहकर समाज में मानसिक रूप से भी श्रेष्ठ नहीं हो सकता स्वयं को दलित कहना जीते जी आत्महत्या करने के समान है।
राजनीति के लिए इस शब्द का जमकर दुरुपयोग हो रहा है अमेरिका में रहने वाला भारतीय नागरिक भी स्वयं को दलित भारतीय कहकर भारत को वहां लज्जित कर रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह समुचित पार्क और स्मारक जिनके नाम के आगे दलित शब्द लिखा है हिंदुस्तान को शर्मसार व लज्जित कर रहे हैं एक सभ्य समाज में रहने वाला इंसान जो अनुसूचित जाति वर्ग से है वह इन स्थलों को देख कर असहज हो जाता है।
मेरा आपसे विनम्र आग्रह है की सरकारी स्मारकों व पार्कों में लिखे जाने वाले दलित शब्द को तुरंत प्रभाव से मिटाया जाए।
दलित शब्द संवैधानिक रूप से भी किसी वर्ग या जाति को कहां जाना प्रतिबंधित है यह दलित शब्द किसी भी सूरत में किसी समाज को श्रेष्ठ नहीं बल्कि लज्जित करता है पुनः मेरा आपसे विनम्र आग्रह है की इस शब्द को सरकारी संस्थानों, स्मारकों और पार्कों से तुरंत प्रभाव से हटवाने का कष्ट करें।
धन्यवाद
भवदीय
शांत प्रकाश जाटव
पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी
अनुसूचित जाति मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी
Monday, March 05, 2018
सावधान मायावती फिर दलितों को छलने जा रही है
सवा लाख नौकरियों में रिवर्ट हुए दलितों की दोषी मायावती समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर रही है जिसने राज्यसभा में प्रोन्नति में आरक्षण का प्रस्ताव फाड़ कर फेंक दिया था
मायावती फिर दलितों को छलने जा रही है
Check out @shantprakash’s Tweet: https://twitter.com/shantprakash/status/970516163930263554?s=09
Monday, January 01, 2018
जाटव अछूत नहीं बल्कि कनवर्टेड यादव व राजपूत हैं
खुद को 5000 साल से दलित शोषित पीड़ित वंचित कहने वाले जाटव 1932 तक यादव या राजपूत थे।
श्री यादव जाटव राजपूत कष्ट निवारक सभा लोटी सफियाबाद के नेताओं की मांग पर 14 जुलाई 1932 को यू. पी. कौंसिल ने उनको निम्नलिखित आदेशानुसार जाटव तय किया
"14 जुलाई सन 1932 ईस्वी नम्बरी C.B. 5523-5568 बनाम कलक्टर साहब बुलंदशहर मिस्टर H.C बालटन साहब बहादुर C.S.I.I.C.S. 1-252 B जूनियर मैम्बर तहरीर फरमाते हैं कि कौन्सिल के प्रश्न नम्बर 65-66-67 उत्तर सहित भेजे जाते हैं और लिखा जाता है कि यू.पी. प्रान्त के तमाम जिलों के कलक्टर महोदयों को जाटव नाम लिखने की सूचना दी है कि इनको जाटव नाम से लिखें"
Wednesday, November 29, 2017
NGT नें जंतर मंतर पर 2 माह पूर्व धरना प्रदर्शन पर लगाई रोक @ArvindKejriwal सरकार नया "धरना स्थल" ढूंढने में हुई एकबार फिर नाकाम
Sunday, November 19, 2017
चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया। दिनाँक 18 नवम्बर 2017 जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा
चमारों के गौरव ब्रिटिश सरकार से द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में बगावत कर अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने वाले 1945 से 1951 तक जेल में बंद रहे चमार रेजिमेंट के वीर हवलदार चुन्नी लाल जी का पगड़ी बांध कर सम्मान करने का गौरव मुझे मिला, मैं धन्य हो गया।
दिनाँक 18 नवम्बर 2017
जय चमार जय हिंदू जाटव महासभा
Monday, October 23, 2017
अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017
अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017
Friday, October 13, 2017
अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन
अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के कार्यकर्ताओं नें भोपुरा, ग़ाज़ियाबाद में किया हवन दिनाँक 13 अक्टूबर 2017
Wednesday, March 08, 2017
भाजपा नेता शान्त प्रकाश जाटव की मुहीम हुई कामयाब रक्षा मंत्री के बाद अनुसूचित जाति आयोग ने चमार रेजिमेंट बहाली के लिया संज्ञान
क्या ‘चमार रेजीमेंट’ फिर होगी बहाल, आयोग ने केंद्र को दिया नोटिस
ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि चमार रेजीमेंट थी तो उसे क्यों खत्म किया गया. बीजेपी अनुसूचित मोर्चा
से जुड़े दलित नेता शान्त प्रकाश जाटव ने अक्टूबर 2015 में केंद्र सरकार से इस रेजीमेंट की बहाली की मांग
की थी. उनका दावा है कि इसी मांग पर नवंबर 2015 में पर्रिकर ने लिखा था कि ‘मामले की जांच करवा रहा हूं’.
Monday, December 12, 2016
एक और कांग्रेसी घोटाले की बू आ रही है
मुझे 14.50 लाख करोड़ से ज्यादा नोट जमा होने की आशंका लग रही है, एक और कांग्रेसी घोटाले की बू ! काश यह वहम निकले नहीं तो भूकम्प आ जायेगा।
Tuesday, September 27, 2016
गुजरात के सफाई कर्मचारी भाई अधीर न हों गलत लोगों के बहकावे में न आएं
गुजरात के सफाई कर्मचारी भाई अधीर न हों गलत लोगों के बहकावे में न आएं सरकार आपके मान सम्मान और स्वाभिमान की चिंता करेगी आपकी मांगों पर विचार करेगी।
Thursday, September 22, 2016
मायावती नें तथाकथित दलितों को सिर्फ ठगा और बेचा, भाजपा नें दिया सम्मान
क्रम रुकने न दें समस्त जानकारी हर मोबाइल में पहुँच जाये तब तक फॉरवर्ड करते रहें
शान्त प्रकाश जाटव
भाजपा सरकार की घोषित योजनाएँ जिसका सीधा लाभ गरीब वर्ग को मिलता है जिनमें अधिकांश अनुसूचित जातियां हैं
प्रधानमन्त्री जनधन योजना – देश के सभी लोगों का खाता खोला गया
बीमा योजना - मात्र 330 रूपये वार्षिक पर 2 लाख का जीवन बीमा और मात्र 12 रूपये वार्षिक पर 2 लाख रूपये का दुर्घटना बीमा
अटल पेंशन योजना – 60 वर्ष के उपरांत 1000 रुपए से 5000 रुपए तक पेंशन योजना
मुद्रा बैंक योजना – छोटे उधमियों को 15 लाख तक कम ब्याज पर बिना गारंटी के ऋण देने की योजना
मेक इन इंडिया – देश के 125000 राष्ट्रीयकृत बेंकों की शाखाओं के माध्यम से प्रत्येक बैंक द्वारा कम से कम 1 या उससे अधिक अनुसूचित जाति वर्ग के व्यवसाई को उधमी बनाना
शिक्षित बनो – अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभावान छात्रों 10 लाख देश में अध्यन व् 20 लाख विदेश में अध्यन हेतु बिना गारंटर ऋण देना
चिकित्सा सम्बन्धी आर्थिक सहायता – 1 लाख वार्षिक आय तक के अनुसूचित जाति समाज के लोगों के लिए ह्रदय रोग, किडनी सम्बन्धी जैसे गंभीर रोग के इलाज के लिए 3 लाख रूपये तक की सहायता का केंद्र सरकार द्वारा प्रावधान
शान्त प्रकाश जाटव
सिर्फ भाजपा नें डॉ अम्बेडकर का किया सम्मान
1. भाजपा सरकार द्वारा डा.अम्बेडकर की जन्मभूमि (महू, मध्य प्रदेश) पर भव्य स्मारक बनाया।
2. डा.अम्बेडकर परिनिर्वाण स्थल दिल्ली स्थित आवास 26 अलीपुर रोड भाजपा सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक एवं संग्रहालय घोषित किया.
3. बाबा साहब डा.अम्बेडकर की दीक्षा भूमि (नागपुर) तथा चैत्य भूमि (दादर, मुंबई) पर भव्य स्मारक का निर्माण भाजपा सरकार नें किया।
4. वर्ष 1989 में भाजपा नें विशेष प्रयास कर संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में डा.अम्बेडकर का चित्र लगवाया और डा.अम्बेडकर को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित करवाया।
5. प्रधानमंत्री मोदी जी ने महाराष्ट्र सरकार को 12 एकड़ इंदु मिल की जमीन पर अम्बेडकर मेमोरियल निर्माण करने का आदेश दिया है। जिसमें एक तालाब, एक 25,000 वर्ग फुट का स्तूप, एक 39,622 वर्ग फुट इंटरैक्टिव संग्रहालय, एक भूमिगत पुस्तकालय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक सभागार ब्लॉक होगा।
6. इंग्लैंड स्थित डॉ अम्बेडकर के निवास को भाजपा सरकार ने वर्ष 2014 में खरीदकर स्मारक बनाया।
7. नई दिल्ली में डॉ अम्बेडकर पुस्तकालय का मोदी जी नें शिलान्यास किया 2015
8. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अलग अलग गठन किया एवं अलग-अलग मंत्रालय बनवाए।
9. अनुसूचित जाति एवं जनजाति के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के रोकथाम और उनके मुकदमों के ट्रायल के लिए विभिन्न राज्यों में 137 विशेष अदालतों एवं विशेष प्रकोष्ठों का गठन किया।
10. आरक्षित रिक्तियों को 50 प्रतिशत सीलिंग की मर्यादा से मुक्त करवाया।
11. अनुसूचित जाति के अभ्यार्थियों को क्वालीफाईंग अंकों में छूट देने और पदोन्नति के समय पर छूट प्रदत स्तर पर नियुक्ति करने का कानून बनाया।
12. 2001 की जनगणना के आधार पर राज्य विधानसभाओं व् लोकसभा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की पुनर्स्थापना का क़ानून बनाया।
13. अनुसूचित जाति एवं जनजाति अभ्यार्थियों को पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान किया।
14. 1991-92 में श्री राजनाथ सिंह जी के शिक्षामंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति के शिक्षकों का बैकलॉग जो पूर्ववर्ती गैर भाजपा सरकारों द्वारा वर्षों से लंबित पड़ा था को शत-प्रतिशत पूर्ण किया गया।
15. उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन भाजपा शासन के दौरान किया गया।
शान्त प्रकाश जाटव
कांग्रेस द्वारा अनुसूचित जाति समाज एवं डा. अम्बेडकर के विरोध में किये गए कार्य :
1. वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा श्री नारायण काजोलकर को काग्रेस प्रत्याशी के रूप में डा.अम्बेडकर के मुकाबले खड़ा कर दिया और डा.अम्बेडकर चुनाव हार गए।
2. वर्ष 1953 में भंडारा (महाराष्ट्र) में लोकसभा उपचुनाव में भी डा.अम्बेडकर के सामने श्री वानखेड़े को कांग्रेस प्रत्याशी बना कर खड़ा कर दिया परिणाम स्वरुप डा.अम्बेडकर पुनः चुनाव हार गए।
3. कांग्रेस नें धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शैक्षिक एवं व्यवसायिक संस्थाओं (देश में लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा) में प्रवेश हेतु अनुसूचित जाति वर्ग को आरक्षण न देने कि अनुमति दी।
4. आज़ादी के बाद देश का कोई भी प्रधानमंत्री रहा हो सब की एक ही नीति रही कि देश के आर्थिक विकास के संसाधनों पर पहला अधिकार केवल अनुसूचित वर्ग का है लेकिन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह नें उपरोक्त सर्वमान्य नीति को बदल कर घोषणा कर दी कि देश के आर्थिक संसाधनों पर अनुसूचित वर्ग का नहीं बल्कि मुसलमानों का हक़ है।
5. अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण को धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमानों को भी देने का कुषड्यंत्र कांग्रेस द्वारा किया गया।
6. कांग्रेस के शासन में 45% लोग गरीबी की रेखा से नीचे थे जिसमें 51% लोगों को बीपीएल कार्ड नहीं मिले।
7. सरकारी गोदामों में हजारो टन गेहूं सड़ता रहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गरीबों में वह अनाज नहीं बांटा गया। मंहगाई के कारण लोग आत्महत्या करने को मजबूर हुए लोग 12 रूपये से 16 रूपये में जीवनयापन करने को मजबूर थे।
8. कांग्रेस सरकार द्वारा दिल्ली में अनुसूचित जाति वर्ग के विकास पर खर्च होने वाला 667 करोड़ रुपया कॉमनवेल्थ गेम के नाम पर खर्च कर दिए गए।
शान्त प्रकाश जाटव
अनुसूचित जाति के युवाओं को किया जा रहा है षड्यंत्रकारी तरीके से गुमराह
1. यूपी में प्रमोशन में आरक्षण का फैसला न होने के कारण कई लाख लोग सिर्फ मायावती के कारण रिवर्ट हुए
जिसके लिए एकमात्र दोषी मायावती है मायावती बताये क्यों ?
· 17.38 करोड़ रूपये लेकर भी सतीश मिश्रा ने पैरवी क्यों नहीं की परिणामतः मुकद्दमा ख़ारिज हुआ?
· मायावती ने लखनऊ बैंच में पैरवी न किये जाने के कारण ख़ारिज हुए मुकद्दमें की इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील क्यों नहीं की ? वह सीधा सुप्रीम कोर्ट क्यों गई ? जहाँ सुप्रीम कोर्ट नें हाई कोर्ट जाने की सलाह देकर मुकद्दमा ख़ारिज किया।
· मायावती नें 212 विधायक होने के बावजूद विधेयक पारित कर कानून क्यों नहीं बनाया ?
2. मायावती दलित की बेटी के नाम पर राजनीति कर रही हैं तीन बार भाजपा के रहम पर मुख्यमंत्री बनीं हर बार धोका, दिया वही हाल अनुसूचित जाति समाज से भी किया। नेशनल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक दलित उत्पीडन की देश में औसतन 30 हज़ार घटनाएँ हर साल होती हैं मायावती के शासन में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अनुसार वर्ष 2007 में 6768, 2008 में 8074, 2009 में 7541 और 2010 में 7062 मामले दलित उत्पीडन के और 2007 में 319, 2008 में 255, 2009 में 265 और 2010 में 235 हत्या के मामले दर्ज हुए।
शान्त प्रकाश जाटव
3. रोहित चक्रवर्ती वेमुला वामपंथी एक्टिविष्ट था वामपंथियों के इशारे पर उसने आतंकवादी याकूब मेनन को फाँसी दिए जाने के विरोध में विद्यालय परिसर में शोक सभा का आयोजन किया था, वो अपने साथियों के साथ अक्सर आतंकवादी याकूब मेनन के लिए नमाज़ पढ़ता था। जिसको विश्वविद्यालय प्रशासन नें गलत मानते हुए सभा कर रहे उसके साथी छात्रों को कुछ शर्तों के साथ निष्कासित किया, जाँच होने तक होस्टल खाली करना, वह बाहर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकता था। स्कालरशिप रोक दी गई, जिसका उसको कतई आभास नहीं था। उसके आकाओं नें भी उसकी मदद नहीं की सम्भवतः उसे उकसाया परिणाम स्वरूप सुसाईड नोट लिख कर उसने आत्महत्या कर ली। विभागीय जांच से पता चला है की वह पिछड़ी जाति से था, बसपाई, कांग्रेसी और वामपंथी उसे दलित बता रहे हैं ताकि दलित हमेशा की तरह मूर्ख बनकर मूर्खता में उन्हें वोट दे !
शान्त प्रकाश जाटव
4. सुनपेड, हरियाणा में दो बच्चों को जिन्दा जलाने की निर्मम घटना, पति पत्नी के आपसी झगड़े के कारण हुई फॉरेंसिक जाचं में मिट्टी के तेल की आधी भरी बोतल भी कमरे में पलँग के पास मिली। मगर बसपाई, कांग्रेसी और वामपंथी इसे दलित उत्पीड़न से जोड़कर दलितों के वोट की खातिर झूठ प्रचारित कर आक्रोश पैदा कर रहे है।
शान्त प्रकाश जाटव
5. उना गुजरात में दलित उत्पीड़न की घटना एक कांग्रेसी विधायक के ईशारे पर हुई जिसके लिए 600 किलोमीटर दूर दमन से नकली गौरक्षक आये जिन्होंने घटना को अंजाम दिया और जानबूझकर तनाव पैदा करने के उद्देश्य से घटना का वीडियो भी स्वयं बनाया जिसे दमन पहुंचकर उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रकाशित भी किया। अब वही कांग्रेसी, वामपंथी, बसपाई दलितों को वोट की खातिर गुमराह कर रहे हैं।
शान्त प्रकाश जाटव
Wednesday, August 31, 2016
हिंदुओं के एक वर्ग को षड्यंत्र स्वरूप वामपंथियों द्वारा अछूत कहा गया
हिंदुओं के एक वर्ग को षड्यंत्र स्वरूप वामपंथियों द्वारा अछूत कहा गया
एकनाथ, तुकाराम, रविदास जैसे अनेकों हिन्दू संत हुए जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
वेद आधारित आर्यसमाज में अनेक ब्राम्हण पुरोहित हुए हैं, जिनके पैर सभी हिन्दू छूते हैं जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
अनेक मंदिरों के ऐसे पुरोहित हैं, जिनसे सभी हिन्दू आशीर्वाद लेते हैं, जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
हमारे यहाँ अनकोें राजा हुए हैं, जिनकी आधीनता सभी हिन्दुओं को स्वीकार्य थी, जिन्हें षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
पुराने काल की बात करें तो
रामायण लिखने वाले महृषि वाल्मिकी, भगवान राम के भी पूज्य थे, जो लव - कुश के गुरु थे, आज भी पूज्य हैं,
महाभारत के लेखक वेदव्यास सबके पूज्य थे, आज भी पूज्य हैं,
भगवान बुद्ध, विष्णु भगवान के दसवें अवतार हैं,
उपरोक्त सभी को षड्यंत्र के तहत अछूत कहा गया।
जबकि, एक हजार वर्ष भारत के शासक हिन्दू नहीं मुस्लिम थे,
दो सौ वर्ष भारत के शासक हिन्दू नहीं ईसाई थे,
1947 से अब तक, सेक्युलर व अछूतों के छद्म शुभचिन्तक बुद्धिजीवियों/ वामपंथियों/ समाजवादियों का शासन रहा है जिन्होनें खुद को अछूतों/ मजदूराें / किसानों का हमदर्द बताया, आप खुद तय करें अछूतों का असली शत्रु कौन है ?
छद्म दलित मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं, समाज को गुमराही के सिवा क्या मिला किसका कितना उत्थान हुआ ?
हजारों - करोड़ का लेदर इण्डस्ट्री को उनके मूल मालिकों से कैसे, किसने चालाकी से छीना ?
सीवेज ट्रीटमेण्ट की परिपाटी उनसे जबरन किसने करवाई ?
हरमों का अपशिष्ट जबरन किसने सिर पर उठवाया ?
पाकिस्तान व बांग्लादेश के अछूतों का, किसने सफाया किया ?
जरा ठण्ढ़े दिमाग से सोचिये
आरक्षण व्यवस्था ने, क्या सब अछूतों को नौकरी दे दी ?
भीम के संविधान ने, क्या सभी अछूतों का उत्थान कर दिया ?
आज अछूतों के उत्थान न होने का जिम्मेवार अछूत स्वयं हैं।
क्योंकि अछूत उनके पीछे चलते हैं जो ईसाई और मुस्लिम देशों से पैसा लेकर इनको गुमराह करते हैं हिन्दुओं को शत्रु बताते हैं और दलित - मुस्लिम का गठजोड़ बनाते हैं।
सावधान कहीं उत्थान के बजाए सफाया न हो जाए ?
क्योंकि कश्मीर से केवल पंडित हीं नहीं अछूत भी साफ हो गए।
शान्त प्रकाश जाटव



