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Monday, April 30, 2018

खुद को दलित कहना आत्महत्या करने के समान है

प्रतिष्ठा में,
आदरणीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार

विषय - सरकारी संस्थानों स्मारकों व पार्कों के नाम में से दलित शब्द हटाने हेतु आग्रह पत्र

मान्यवर
उत्तर प्रदेश लगभग 22 करोड़ आबादी का सबसे बड़ा प्रदेश है यहां विभिन्न जाति धर्म के लोग रहते हैं इस कारण से राजनीतिक दलों  व राजनीतिज्ञों के रडार पर उत्तर प्रदेश हमेशा रहा है और यही कारण है कि जो जो सरकारें उत्तर प्रदेश में शासन करने आती है वह अपने तरीके से इस प्रदेश पर अपने कार्य की छाप छोड़ने का प्रयास करती है जो कि अच्छा भी है। इससे प्रदेश का आमूलचूल विकास होता है और साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व बढ़ता है।
उसी श्रेणी में एक सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पार्कों के निर्माण किए गए जिनके नामकरण में दलित शब्द का जमकर उपयोग किया गया। एक पार्क दलित प्रेरणा स्थल हो सकता है यह अपने आप में विचारणीय विषय है एक वर्ग को दलित कहकर की जाने वाली घिनौनी राजनीति का परिचायक है। एक स्वस्थ सामाजिक इंसान स्वयं को दलित कहकर समाज में मानसिक रूप से भी श्रेष्ठ नहीं हो सकता स्वयं को दलित कहना जीते जी आत्महत्या करने के समान है।
राजनीति के लिए इस शब्द का जमकर दुरुपयोग हो रहा है अमेरिका में रहने वाला भारतीय नागरिक भी स्वयं को दलित भारतीय कहकर भारत को वहां लज्जित कर रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह समुचित पार्क और स्मारक जिनके नाम के आगे दलित शब्द लिखा है हिंदुस्तान को शर्मसार व लज्जित कर रहे हैं एक सभ्य समाज में रहने वाला इंसान जो अनुसूचित जाति वर्ग से है वह इन स्थलों को देख कर असहज हो जाता है।
मेरा आपसे विनम्र आग्रह है की सरकारी स्मारकों व पार्कों में लिखे जाने वाले दलित शब्द को तुरंत प्रभाव से मिटाया जाए।
दलित शब्द संवैधानिक रूप से भी किसी वर्ग या जाति को कहां जाना प्रतिबंधित है यह दलित शब्द किसी भी सूरत में किसी समाज को श्रेष्ठ नहीं बल्कि लज्जित करता है पुनः मेरा आपसे विनम्र आग्रह है की इस शब्द को सरकारी संस्थानों, स्मारकों और पार्कों से तुरंत प्रभाव से हटवाने का कष्ट करें।
धन्यवाद

भवदीय

शांत प्रकाश जाटव
पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी
अनुसूचित जाति मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी