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Monday, April 24, 2023

अंबेडकर जयंती और भगवान परशुराम जयंती पर शांत प्रकाश जाटव द्वारा आँखें खोल देने वाला वक्तव्य


अंबेडकर जयंती और भगवान परशुराम जयंती पर शांत प्रकाश जाटव द्वारा आँखें खोल देने वाला वक्तव्य

https://youtu.be/TRXvlWHuwaE

Monday, November 28, 2022

वामपंथियों ने अम्बेडकर का जानबूझकर महिमामंडन किया, क्योंकि वह हिन्दू विरोधी थे

बाबू जगजीवन राम अनुसूचित जाति के लोकप्रिय हिन्दू नेता थे जनता ने उन्हें लगभग सभी चुनाव जिताए लेकिन वामपंथियों ने अम्बेडकर का जानबूझकर महिमामंडन किया, क्योंकि वह हिन्दू विरोधी थे, हिन्दू धर्म से अनुसूचित जाति के लोगों को तोड़ने के लिए अम्बेडकर को मोहरा बनाया गया है।
शान्त प्रकाश जाटव

Friday, October 04, 2019

अंबेडकर संविधान निर्माता नहीं - शांत प्रकाश जाटव

डॉक्टर अंबेडकर संविधान निर्माता नहीं थे वह केवल संविधान निर्माण सभा के सदस्य थे और प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे
बामसेफ और वामपंथी लेखक समाज को गुमराह करने के लिए उन्हें संविधान निर्माता बताते हैं

भारतीय संविधान सभा में 389 सदस्य थे
9 दिसम्बर 1946 को प्रथम बैठक हुई और 26 नवम्बर 1949 को संविधान तैयार हुआ।
जिसमें 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे

संविधान सभा के अध्यक्ष-डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी थे
उपाध्यक्ष-एच. मुखर्जी
संवैधानिक सलाहकार- बी.एन.राव

कुल 13 समितियां
(1) संघ शक्त समिति
(2) संविधान समिति
(3) राज्यों के लिए समिति
(4) राज्यों,रियासतों से परामर्श समिति
(5) मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक समिति
( 6) प्रांतीय संविधान समिति
( 7) मौलिक अधिकार उपसमिति
( 8) झण्डा समिति
(9) प्रक्रिया नियम समिति
(10) सर्वोच्च न्यायालय संबंधित समिति
(11) प्रारूप सविधिक समिति
(12) संविधान समीक्षा आयोग
( 13) प्रारूप समिति
1. मोहम्मद सादिला
2.अल्लादी कृष्णस्वामी
3. एन.गोपाल स्वामी अय्यर
4.एन.माधवाचार्य
5. कन्हैयालाल माणिक्य लाल मुंशी
6.टी.टी.कृष्णमाचारी
7.भीमराव अंबेडकर

Monday, October 23, 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

अखिल भारतीय हिन्दू जाटव महासभा के तत्वावधान में मोहन नगर ग़ाज़ियाबाद में सम्पन्न हुआ हवन दिनाँक 22 अक्टूबर 2017

Wednesday, June 29, 2016

Dr Ambedkar राजनैतिक लाभ के लिए मसीहा कहना वामपंथी षड्यंत्र

Dr Ambedkar का देश के लिए योगदान सराहनीय है परंतु राजनैतिक लाभ के लिए उन्हें मसीहा के रूप में निरोपित करना वामपंथी षड्यंत्र है इसे समझना होगा

Check out @shantprakash's Tweet: https://twitter.com/shantprakash/status/748009742061142016?s=09

Thursday, June 16, 2016

अछूत ब्राह्मण या वेदों नें नहीं अंग्रेजों नें बनाया

अछूत कौन ? डॉ अम्बेडकर नें अपनी पुस्तक "who were the shudras" अनुवादित संकलन 'अछूत कौन और कैसे' के पृष्ठ 67 पर स्पष्ट किया है की हिन्दुओं को बाँटने की यह अंग्रेजों की योजना थी. 1871 में भारत में सर्वप्रथम जनगणना हुई तदुपरांत 1881, 1891 व् 1901 तक जनगणना धर्माधारित होती रही जिसमें 1. हिन्दू 2. मुस्लिम 3. ईसाई की जनसँख्या के अतिरिक्त कुछ नहीं किया गया. 1901 की जनगणना के अनुसार मुस्लिमों की जनसँख्या लगभग 6 करोड़ 20 लाख थी. 1911 की जनगणना में हिन्दुओं को बाँटने के आशय से हिन्दुओं को तीन भागों में बांटा गया

1. हिन्दू 
2. प्रकृति पूजक आदिवासी 
3. अछूत 

यहाँ अछूत कौन होगा उसके लिए 10 मापदंड जनसँख्या आयुक्त द्वारा तय किये गए, मापदंड निम्नानुसार थे 

1. जो ब्राह्मणों की प्रधानता नहीं मानते 
2. जो किसी ब्राह्मण अथवा अन्य किसी माने हुए हिन्दू गुरु से मंत्र नहीं लेते 
3. जो वेदों को प्रमाण नहीं मानते 
4. जो हिन्दू देवी देवताओं को नहीं पूजते 
5. जिनका अच्छे ब्राह्मण संस्कार नहीं करते 
6. जो कोई ब्राह्मण पुरोहित नहीं रखते 
7. जो हिन्दू मंदिर के भीतर नहीं जा सकते 
8. जो स्पृश्य नहीं हैं अथवा निर्धारित सीमा के भीतर आ जाने से अपवित्रता का कारण होते हैं 
9. जो अपने मुर्दों को गाढ़ते हैं
10. जो गोमांस खाते हैं और गौ का किसी प्रकार से आदर नहीं करते   

इस आधार पर 1911 की जनगणना द्वारा हिन्दुओं को अंग्रेज हुकुमत नें वर्गीकृत कर अछूतों का निर्माण किया जिन्हें अछूत, दलित, डिप्रेस्ड आदि कहा गया.
  

Thursday, December 03, 2015

डॉ अम्बेडकर के दीक्षा स्थल नागपुर पर हिन्दू धर्म विरोधी प्रतिज्ञाओं का अवैध शिलापट हटाने के सन्दर्भ में शिकायत पत्र.







डॉ अम्बेडकर के दीक्षा स्थल नागपुर पर हिन्दू धर्म विरोधी प्रतिज्ञाओं का अवैध शिलापट हटाने के सन्दर्भ में शिकायत पत्र.



प्रतिष्ठा में,                                            दिनांक – 3 दिसम्बर 2015

आदरणीय श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी
माननीय प्रधानमन्त्री, भारत सरकार,
प्रधानमन्त्री कार्यालय, साउथ ब्लाक, नई दिल्ली – 110011

विषय – डॉ अम्बेडकर के दीक्षा स्थल नागपुर पर हिन्दू धर्म विरोधी प्रतिज्ञाओं का अवैध शिलापट हटाने के सन्दर्भ में शिकायत पत्र.

मान्यवर,

14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में डॉ भीम राव अम्बेडकर जी ने खुद और अपने समर्थकों के साथ एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया जिसमें एक बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न “बुद्धं, धम्म, संघं” और पंचशील 1. हत्या न करना 2. चोरी न करना 3. व्यभिचार न करना 4. असत्य न बोलना 5. मद्धपान न करना, को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण किया. 4 एकड़ में फैले दीक्षा स्थल पर भव्य स्तूप का उद्घाटन 18 दिसम्बर 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम के. आर. नारायणन जी द्वारा किया गया.

वर्ष 2012 में दीक्षा स्थल के प्रांगण में एक शिलापट लगाया गया है जिसपर 22 प्रतिज्ञाएँ लिखी हैं जिन्हें डॉ अम्बेडकर द्वारा ली गई प्रतिज्ञाएँ बताया गया है जो निम्नानुसार हैं –

1.    मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
2.    मैं राम और कृष्ण जो भगवान के अवतार माने जाते हैं में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
3.    मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
4.    मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ.
5.    मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ.
6.    मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
7.    मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा.
8.    मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा.
9.    मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ.

10.  मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा.

11.  मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करूँगा.

12.  मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परिमितों का पालन करूँगा.

13.  मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.

14.  मैं चोरी नहीं करूँगा.

15.  मैं झूठ नहीं बोलूँगा.

16.  मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.

17.  मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.

18.  मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.

19.  मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ.

20.  मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.

21.  मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).

22.  मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा.

अपने धर्म का प्रचार करना व्यवाहरिक है परन्तु किसी अन्य ध्रर्म का अपमान करना न केवल अव्यवहारिक बल्कि असंवैधानिक है. वैसे भी उक्त प्रतिज्ञाओं के सन्दर्भ में डॉ अम्बेडकर द्वारा लिखित कोई भी प्रमाणिक पुस्तक या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे प्रतीत होता है की यह किसी षड्यंत्र के तहत सिर्फ हिन्दू धर्म को दुनिया में बदनाम करने के आशय से उक्त शिलापट लगाया गया है.

डॉ अम्बेडकर दीक्षा स्थल बुद्ध धर्म का प्रचार व् शोध केंद्र भी है इसलिए सम्पूर्ण विश्व से लाखों श्रद्धालु, सैलानी, छात्र व् शोधकर्ता इस स्थान पर पूजा, पर्यटन व् अध्यन के लिए आते हैं जो इस शिलापट पर लिखी प्रतिज्ञाओं को पढकर हिन्दू धर्म के प्रति दुर्भावना मन में बना कर साथ ले जाते हैं. अचरज का विषय है की इस दीक्षा स्थल का रख रखाव सरकार द्वारा किया जाता है और उसकी आँखों के सामने हिन्दू धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार हो रहा है.

जिससे मेरे सहित तमाम हिन्दुओं की भावनाओं को कष्ट पहुँचता है.

मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है की जिन्होंने इसको लगाया उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने के षड्यंत्र के आरोप में सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी सुनिश्चित करे और हिन्दुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उक्त शिलापट को तुरंत हटाये जाने के लिए निर्देशित करें.

भवदीय



शान्त प्रकाश जाटव

Thursday, December 11, 2014

डॉ भीम राव अम्बेडकर परिनिर्वाण स्थली पर पुष्पांजली

26 अलीपुर रोड डॉ भीम राव अम्बेडकर परिनिर्वाण स्थली पर पुष्पांजली #Ambedkar