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Monday, August 12, 2019

चमार रेजीमेंट के महत्व को कम करने का प्रयास करने वाले मूर्ख वामपंथी साहित्यकारों को सही अध्ययन की जरूरत- शांत प्रकाश जाटव

चमार रेजीमेंट के महत्व को कम करने का प्रयास करने वाले मूर्ख वामपंथी साहित्यकारों को सही अध्ययन की जरूरत- शांत प्रकाश जाटव

August 11, 2019



संदीप त्यागी.
नई दिल्ली. 10 अगस्त. इतिहास के साथ हमेशा छल-छदम की रीति-नीति का प्रयोग करने वाले वामपंथी साहित्यकार अब गौरवशाली चमार रेजीमेंट के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके अपनी कुत्सित मानसिकता का परिचय दे रहे हैं. वरिष्ठ भाजपा नेता तथा चमार रेजीमेंट बहाली के लिए आंदोलन चला रहे शांत प्रकाश जाटव ने वामपंथी साहित्यकारों पर चमार रेजीमेंट से जुड़े तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाज में आई जागृति के बाद अब वामपंथी साहित्यकार चमार

Shant Prakash Jatav, President Chamar Resigiment Forum

रेजीमेंट की महत्ता को कम करने का दुष्प्रयास कर रहे हैं. जाटव ने कहा कि चमार रेजीमेंट के गठन का समय 1 मार्च 1943 बताने वाले मूर्ख वामपंथी साहित्यकारों को कम से कम डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर द्वारा दलित वर्गों संबंधी भारतीय मताधिकार कमेटी (लोथियन कमेटी) में 1 मार्च 1932 को दी गई रिपोर्ट को पढ़ लेना चाहिए जिसमें डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर ने स्पष्ट कहा है कि ‘आगरा जिले के टुंडला नगर में मैंने जायसवारों की पूरी बस्ती देखी जहां जांच करने पर पता चला कि वे चमार रेजीमेंट के उन साईसों के वंशज थे, जो वहां आकर बस गए’. जिससे साफ है कि अगर 1932 में डॉ. अंबेडकर चमार रेजीमेंट के वंशजों को खोज कर रहे थे, तो वर्ष 1943 में चमार रेजीमेंट का गठन बताने वाले वामपंथी साहित्यकारों को सही तरह से अध्ययन करने की जरूरत है. जाटव ने कहा कि चमार समाज के लोगों को भी वामपंथी साहित्यकारों के इस झांसे में नहीं आना चाहिए कि चमार रेजीमेंट का कार्यकाल सिर्फ तीन वर्ष का ही रहा था, जैसा कि वामपंथी साहित्यकार दुष्प्रचार कर रहे हैं. और इस दुष्प्रचार के झांसे में आकर हाल ही चमार रेजीमेंट का स्थापना

(लोथियन कमेटी रिपोर्ट में दर्ज की गई डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की टिप्पणी)

दिवस मनाने की शुरूआत हुई है. जाटव ने कहा कि वामपंथी साहित्यकार इसलिए इस रेजीमेंट का महत्व कम करने की मुहिम में जुटे हैं, क्योंकि चमार रेजीमेंट के वीर सिपाहियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के साथ मिलकर अंग्रेजों को धूल चटाने का काम किया था, जिन्हें वामपंथी अपना पितामह मानते हैं. यह भी पढ़ें : जाटव नहीं हैं चमार, यादव और राजपूत जातियों से कन्वर्टेड है जाटव समाज, 1935 में प्रकाशित अनुसूचित जातियों की सूची में जाटव जाति का कोई उल्लेख नहीं- शांत प्रकाश जाटव शांत प्रकाश ने समाज को भी आगाह करते हुए कहा कि चमार रेजीमेंट बहाली फोरम के गठन के बाद से समाज में अपने इतिहास को लेकर जो जागृति आई है, उससे वामपंथी साहित्यकार और समाज के ही कुछ गद्दार तिलमिला उठे हैं. और वह हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि या तो वह इस आंदोलन को अपनी मिल्कियत बना सकें और इसमें नाकामी के बाद अब वह चमार रेजीमेंट के रूतबे को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने कहा कि चमार रेजीमेंट के गौरव से खेलने का प्रयास करने वाले ऐसे साहित्यकारों को करारा जवाब मिलेगा. उन्होंने कहा कि समाज को भी चाहिए कि एक निर्णायक मुकाम की तरफ बढ़ रही समाज के गौरव की इस लड़ाई में शामिल होने का प्रयास करने वाले ऐसे अराजक तत्वों पर नजर रखे, जो इस पूरे प्रयास को निष्फल करने के प्रयास में जुटे हैं.

Saturday, December 16, 2017

भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की मांग दोहराई, चमार रेजीमेंट के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी के दर्जे की मांग


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 December 4, 2017 


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चमार रेजीमेंट के सैनिक चुन्नीलाल को पगड़ी बांधकर सम्मानित करते भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव


नई दिल्ली. 04 दिसंबर. अखिल भारतीय हिंदू जाटव महासभा के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी के नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुर्नस्थापना किये जाने तथा चमार रेजीमेंट के शहीद सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिये जाने की मांग दोहराई है.


प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र की प्रतिलिपि


जाटव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट ने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आईएनए में शामिल होकर, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए उनके दांत खट्टे कर दिए थे. जिसके परिणामस्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु वह मांग कर रहे हैं. विदित हो कि श्री जाटव ने इसी मुद्दे को लेकर बीते 17 अक्टूबर 2015 को महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री तथा अन्य विभागों को पत्र लिखे थे, जिसके बाद तत्कालीन केन्द्रीय रक्षामन्त्री मनोहर पर्रिकर ने उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया था. इसी मामले को लेकर केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मार्च 2017 में रक्षा सचिव को तथा नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चमार रेजीमेंट को बहाल करने की मांग की है. यह भी पढ़ें : भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का मायावती के बयान पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप  भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव ने प्रधानमंत्री को यह स्मरण पत्र लिखकर याद दिलाते हुए कहा है, कि आजादी की लड़ाई में चमार रेजीमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे आग्रह है, कि वीर चमार रेजीमेंट की भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये. साथ ही  चमार रेजीमेंट के ऐसे सैनिक जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिन्हें अंग्रेजों ने बागी घोषित कर 1943 में जेलों में यातनाएं दीं थीं, ऐसे सभी सैनिकों को राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये. 
इसके अलावा चमार रेजीमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व सभी जिलों में शौर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाने की भी मांग की है, ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को समझ सके. साथ ही श्री जाटव ने  चमार रेजीमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल किये जाने का भी अनुरोध किया है. श्री जाटव ने पत्र में लिखा है, कि चमार रेजीमेंट के इन वीर सैनिकों की वीरता और शहादत की कहानियां समाज को उनके पूर्वजों शौर्यगाथा से अवगत करायेंगी और मौजूदा पीढ़ी को पता चलेगा कि उनके समाज का कैसा गौरवशाली इतिहास रहा है.


Monday, December 04, 2017

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

शान्त प्रकाश जाटव       
भारतीय जनता पार्टी
पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी
अनुसूचित जाति मोर्चा

279, ज्ञान खंड 1, इंदिरा पुरम, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश 9871952799

प्रतिष्ठा में,                                              
आदरणीय श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी
माननीय प्रधानमन्त्री, भारत सरकार,
प्रधानमन्त्री कार्यालय, साउथ ब्लाक, नई दिल्ली – 110011

विषय: अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना व् सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये  

मान्यवर,

वीर चमार रेजिमेंट जिसने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर सुभाषचंद्र बोस के साथ आई एन ए में शामिल हो, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर उनके दांत खट्टे कर दिए परिणाम स्वरुप देश में विद्रोह की लहर उठी और अंग्रेजों को भारत छोड़ने का कदम उठाना पड़ा उसी दौरान अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल घोषित किया और चमार रेजिमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी भारतीय सेना में पुन: बहाली हेतु हम वर्षों से मांग कर रहे हैं 17 अक्टूबर 2015 को मैंने महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय गृहमंत्री, केन्द्रीय रक्षामन्त्री व् अन्य विभागों को पत्र लिखे थे. तदुपरांत केन्द्रीय रक्षामन्त्री द्वारा कार्यवाही हेतु आश्वासन मिला, केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग नें मार्च 2017 रक्षा सचिव को पत्र लिखा व् नवम्बर 2017 को अनुसूचित जाति आयोग, पंजाब सरकार नें भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा. आजादी की लड़ाई में चमार रेजिमेंट के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए आपसे पुन: विनम्र आग्रह है की

1.     वीर चमार रेजिमेंट की शीघ्र अति शीघ्र भारतीय सेना में पुन: बहाली की जाये.

2.     चमार रेजिमेंट के सेनिकों जो अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद हुए या जिनको अंग्रेजों नें बागी घोषित कर 1943 में जेलों में बंद कर यातनाएं दीं को सभी राज्य सैनिक बोर्डों द्वारा सूचीबद्ध कराकर स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाये.

3.     चमार रेजिमेंट के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने हेतु राजधानी दिल्ली सहित, सभी प्रदेशों की राजधानियों व् समस्त जिलों में शोर्य स्तम्भ स्थापित कराये जाएँ ताकि समाज चमार जाति के गौरवशाली इतिहास को जानें उनके देशभक्ति के जज्बे को समझे और फख्र करे.

4.     चमार रेजिमेंट की वीरता की कथाएं पाठ्य पुस्तकों में शामिल की जाये.

सादर

भवदीय

(शान्त प्रकाश जाटव)

Monday, November 13, 2017

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

भारत की आज़ादी में योगदान देने वाली अंग्रेज सेना से बगावत कर सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने वाली अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित "चमार रेजिमेंट" की भारतीय सेना की पुनः बहाली हेतु "विशाल धरना" दिनाँक 20 दिसंबर 2017 रामलीला मैदान में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है

Sunday, October 18, 2015

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट ( Veer Chamar Regiment ) की भारतीय सेना में पुन: स्थापना हेतु प्रधानमन्त्री जी को लिखा पत्र



अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट ( Veer Chamar Regiment ) की भारतीय सेना में पुन: स्थापना हेतु प्रधानमन्त्री जी को लिखा पत्र 

Saturday, October 17, 2015

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट ( Veer Chamar Regiment ) की भारतीय सेना में पुन: स्थापना हेतु प्रधानमन्त्री जी को लिखा पत्र



अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट ( Veer Chamar Regiment ) की भारतीय सेना में पुन: स्थापना हेतु प्रधानमन्त्री जी को लिखा पत्र 

अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट ( Veer Chamar Regiment ) की भारतीय सेना में पुन: स्थापना हेतु प्रधानमन्त्री जी को लिखा पत्र

प्रतिष्ठा में,                                             दिनांक 17 अक्टूबर 2015

आदरणीय श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी
माननीय प्रधानमन्त्री, भारत सरकार,
प्रधानमन्त्री कार्यालय, साउथ ब्लाक, नई दिल्ली – 110011

विषय: अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित वीर चमार रेजिमेंट की भारतीय सेना में पुन: स्थापना

मान्यवर,
अंग्रेजों द्वारा स्थापित चमार रेजिमेंट को आई एन ए से मुकाबले के लिए अंग्रेजों द्वारा कैप्टन मोहन लाल कुरील के नेतृत्व में सिंगापुर भेजा गया. जहाँ कैप्टन मोहन लाल कुरील नें देखा की अंग्रेज चमारों के हाथों अपने ही देशवासियों को मरवा रहे हैं, परिणामस्वरूप उन्होंने चमार रेजिमेंट को आई एन ए में शामिल कर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने का निर्णय लिया. अंग्रेजों नें 1946 में चमार रेजिमेंट पर प्रतिबन्ध लगा दिया. अंग्रेजों से युद्ध के दौरान हजारो चमारों नें अपने प्राणों की आहुति दी, कुछ म्यांमार व् थाईलेंड के जंगलों में भटक गए जो पकड़े गए उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. कैप्टन मोहन लाल कुरील को भी युद्धबंदी बना लिया गया जिन्हें आजादी के बाद रिहा किया गया जो 1952 में उन्नाव की सफीपुर विधान सभा से विधायक भी रहे.

जैसा की विदित है की चमार रेजिमेंट नें आई एन ए के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर न केवल देशभक्ति का परिचय दिया बल्कि चमार जाति का सिर भी गौरव से ऊँचा किया.

इस पत्र के माध्यम से आपसे विनम्र आग्रह है की चमारों की वीरता के गौरवशाली इतिहास को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना में चमार रेजिमेंट को पुन: स्थापित करने का कष्ट करें.

सादर

भवदीय


(शान्त प्रकाश जाटव)